चीन में चल रहे एससीओ समिट के दौरान कई कूटनीतिक तस्वीरें दुनिया के सामने आईं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा का विषय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दोस्ती रही। दोनों नेता जब द्विपक्षीय बैठक के लिए एक ही कार में बैठकर पहुंचे, तो यह तस्वीर न सिर्फ भारत-रूस की मजबूत साझेदारी का संदेश दे रही थी, बल्कि अमेरिका के लिए भी यह चिंता का कारण बन गई। सात साल बाद पीएम मोदी का चीन दौरा पहले से ही वैश्विक राजनीति में अहम माना जा रहा है।
भारत-रूस की नजदीकी पर सबकी नजर
भारत और रूस के बीच रिश्तों की गहराई समिट के दौरान साफ दिखाई दी। दोनों नेताओं का एक साथ कार से निकलना यह दिखाता है कि मौजूदा वैश्विक हालात में दोनों देश रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना चाहते हैं। अमेरिका की ओर से भारत पर लगातार रूसी तेल खरीद को लेकर दबाव बनाया जा रहा है, ऐसे में यह दृश्य पश्चिमी देशों को भी साफ संदेश देता है।
आतंकवाद के खिलाफ भारत की बड़ी जीत
समिट का एक और अहम पहलू आतंकवाद पर साझा रुख रहा। सभी सदस्य देशों ने पहलगाम हमले की निंदा करते हुए पीड़ितों और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। घोषणापत्र में साफ कहा गया कि आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मानक बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाना ही होगा। भारत के लिए यह बड़ी रणनीतिक सफलता है कि इस मंच पर आतंकवाद पर एकजुटता दिखाई गई।
साझा सहयोग और नई पहल
घोषणापत्र में विज्ञान, तकनीकी और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में भारत की पहलों की सराहना की गई। सांस्कृतिक आदान-प्रदान और स्टार्टअप सहयोग को भी अहम मानते हुए सदस्य देशों ने नई संभावनाओं पर जोर दिया। यह संदेश दुनिया को गया कि भारत न केवल राजनीतिक और सुरक्षा मामलों में बल्कि विकास और इनोवेशन में भी मजबूत भूमिका निभा रहा है।