प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात ने इस बार दुनिया को साफ संदेश दिया कि भारत किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपने हितों के आधार पर फैसले करेगा। हैदराबाद हाउस के बाहर मोदी ने पुतिन का स्वागत बेहद गर्मजोशी से किया, जिसे इंटरनेशनल मीडिया ने खास तौर पर नोट किया। ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीति दो खेमों में बंटी दिख रही है, भारत का यह कूटनीतिक आत्मविश्वास पश्चिमी देशों के लिए भी एक संकेत है। यही वजह है कि पुतिन की यह यात्रा गेमचेंजर कही जा रही है।
भारत की सुरक्षा कवच हुआ और मजबूत
23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में सबसे बड़े फैसले रक्षा क्षेत्र में हुए। भारत पहले ही S-400 एयर डिफेंस सिस्टम ले चुका है, लेकिन अब अतिरिक्त S-400 की खरीद पर भी बातचीत आगे बढ़ी है। इसी के साथ रूस ने भारत को 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट SU-57 देने का रास्ता भी साफ कर दिया है। खास बात यह कि इसकी 70% तकनीक भारत को मिल सकती है, यानी भविष्य में इसका उत्पादन यहीं होगा। इतना ही नहीं, भारत S-500 सिस्टम में भी रुचि दिखा रहा है, जो दुनिया के सबसे तेज और उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम में गिना जाता है। नौसेना के लिए मिसाइल और पनडुब्बी तकनीक पर भी बातचीत हुई, जिससे भारत की सैन्य क्षमता कई गुना बढ़ सकती है।
ऊर्जा में भी मेगा फायदा, 100 अरब डॉलर व्यापार की तैयारी
अमेरिका की सख्त चेतावनियों के बावजूद रूस भारत को सबसे कम कीमत पर कच्चा तेल दे रहा है। पुतिन के साथ आई रूसी कंपनियों की टीम ने भारत से तकनीकी उपकरण और सहयोग की मांग रखी है। इसके अलावा सखालिन-1 प्रोजेक्ट में ONGC Videsh की 20% हिस्सेदारी वापस दिलाने पर भी चर्चा हुई है। माना जा रहा है कि भारत–रूस इस बार 100 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य को अंतिम रूप दे सकते हैं। इसमें आर्कटिक प्रोजेक्ट्स, कुदनकुलम न्यूक्लियर प्लांट, उर्वरक आपूर्ति, डिजिटल पेमेंट सिस्टम और रुपये-रूबल ट्रेड पर विशेष फोकस रहेगा। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वित्तीय स्वतंत्रता दोनों मजबूत होंगी।
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पुतिन की फिटनेस और मोदी–पुतिन की केमेस्ट्री चर्चा में
73 साल की उम्र में भी पुतिन की फिटनेस दुनिया को हैरान करती है। उनका भोजन सुरक्षा जांच से गुजरता है और वह बेहद हल्का, पौष्टिक खाना खाते हैं जिसमें काशा, बटेर के अंडे, कॉटेज चीज, बीटरूट जूस और फिश-सब्जियां शामिल हैं। उनकी सक्रिय जीवनशैली भी इस यात्रा का बड़ा चर्चित पहलू बनी। लेकिन सबसे ज्यादा असर मोदी–पुतिन की केमेस्ट्री ने ही दिखाया। इस मुलाकात ने साबित कर दिया कि भारत अब वैश्विक रणनीति में एक स्वतंत्र, संतुलित और मजबूत शक्ति बन चुका है। रक्षा सौदों, ऊर्जा सहयोग और नए व्यापार रोडमैप ने यह साफ कर दिया कि यह यात्रा केवल कूटनीति नहीं, बल्कि भारत के अगले दशक की रणनीति का संकेत है।