हर गणतंत्र दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पहनावा केवल औपचारिक पोशाक नहीं रहता, बल्कि भारत की विविध संस्कृतियों, शिल्प परंपराओं और प्रतीकात्मक रंगों का मंच बन जाता है। उनकी पगड़ी, टोपी और स्टोल देश के अलग–अलग क्षेत्रों की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर उजागर करते हैं। 2015 से 2026 तक उनका हर रिपब्लिक डे लुक अपने भीतर इतिहास, संस्कृति और संदेश समेटे नजर आया।
परंपरा को मंच देने की शैली
प्रधानमंत्री मोदी के गणतंत्र दिवस परिधान की खास बात यह रही है कि हर साल किसी न किसी राज्य या सांस्कृतिक धरोहर को केंद्र में रखा जाता है। कभी राजस्थानी बंधनी, कभी उत्तराखंड की पारंपरिक टोपी तो कभी गुजरात की विशेष पगड़ी—उनका पहनावा भारत की बहुरंगी पहचान का प्रतीक बनता रहा है। यही कारण है कि हर वर्ष उनका लुक समारोह के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी चर्चा का विषय बन जाता है।
2026 से 2024 तक: रंगों और प्रतीकों का संतुलन
2026 में प्रधानमंत्री मोदी ने मरून रंग की पगड़ी पर सुनहरी पट्टी के साथ नीले कुर्ते का संयोजन चुना, जिसने गंभीरता और गरिमा का संदेश दिया। 2025 में मरून टोन की पगड़ी में केसरिया रंग की झलक साहस और त्याग का प्रतीक बनी। वहीं 2024 में केसरिया ‘बांधनी’ पगड़ी ने पारंपरिक सौंदर्य को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उजागर किया और उनका यह अंदाज़ खासा चर्चित रहा।
2023 से 2021: क्षेत्रीय पहचान का सम्मान
2023 में बहुरंगी राजस्थानी पगड़ी के साथ सफेद कुर्ता और काला कोट संतुलित संयोजन के रूप में सामने आया। 2022 में उत्तराखंडी टोपी, मणिपुरी स्टोल और सफेद परिधान ने विविधता में एकता का संदेश दिया। 2021 में गुजरात के जामनगर की खास पगड़ी गुलाबी–लाल रंगों के साथ शाही छवि प्रस्तुत करती दिखी, जिसने समारोह में अलग पहचान बनाई।
2020 से 2017: उत्सव और सौम्यता का मेल
2020 में केसरिया पगड़ी और रंगीन सदरी ने पर्व जैसा माहौल रचा। 2017 में गुलाबी पगड़ी के साथ प्रधानमंत्री का लुक सौम्यता और संतुलन का प्रतीक बना। इन वर्षों में उनके परिधान ने यह दिखाया कि रंगों के माध्यम से भी राष्ट्रीय मंच पर सांस्कृतिक संदेश दिए जा सकते हैं।
2016 और 2015: परंपरा की मजबूत शुरुआत
2016 में पीली जोधपुरी शैली की पगड़ी और पारंपरिक पोशाक ने पहली बार विदेशी सैन्य टुकड़ी की मौजूदगी वाले समारोह में अलग छाप छोड़ी। वहीं 2015 में, अपने पहले गणतंत्र दिवस पर, राजस्थानी बंधनी पगड़ी पहनकर प्रधानमंत्री मोदी ने परंपरा को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की शुरुआत की—जो आगे चलकर हर साल का खास आकर्षण बन गई।