नरेंद्र मोदी के यूएई दौरे को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और महंगे होते तेल-गैस के बीच भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। प्रधानमंत्री ने अबू धाबी में यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने पर सहमति बनी।
LPG और पेट्रोलियम भंडार पर समझौता
इस दौरे के दौरान रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और LPG सप्लाई को लेकर बड़ा समझौता हुआ है। माना जा रहा है कि इससे भारत को भविष्य में ईंधन सप्लाई को लेकर ज्यादा स्थिरता मिल सकेगी। खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक ऊर्जा बाजार तनाव और अनिश्चितता से गुजर रहा है।
गुजरात में जहाज मरम्मत प्रोजेक्ट भी शामिल
भारत और UAE के बीच वाडिनार में जहाजों की मरम्मत से जुड़ा समझौता भी हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत के समुद्री और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मजबूती मिल सकती है और भविष्य में यह बड़ा औद्योगिक केंद्र बन सकता है।
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भारत में आएगा 5 अरब डॉलर का निवेश
यूएई ने भारत में 5 अरब डॉलर के बड़े निवेश का भी ऐलान किया है। यह निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर, बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर में किया जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक RBL Bank और Sammaan Capital जैसे सेक्टर्स में भी निवेश की योजना है। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था और निवेश माहौल को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी ने Strait of Hormuz के खुले और सुरक्षित बने रहने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान जरूरी है और भारत हर परिस्थिति में UAE के साथ खड़ा रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा भारत की ऊर्जा सुरक्षा और विदेशी निवेश दोनों के लिहाज से बड़ा कदम साबित हो सकता है।