
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2020 के गलवान संघर्ष के बाद पहली बार चीन जा रहे हैं. वो वहां 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच होने वाले शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. ये दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वार (ट्रेड वॉर) को लेकर दुनिया में हलचल है. अमेरिका, चीन और भारत के रिश्तों को लेकर सभी की नजरें इस दौरे पर टिकी हुई हैं.
अमेरिका का क्या रुख है?
प्रधानमंत्री मोदी के चीन दौरे को लेकर अमेरिका की तरफ से भी प्रतिक्रिया आई है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी विदेश विभाग के डिप्टी स्पोक्सपर्सन टॉमी पिगॉट से सवाल किया गया कि अमेरिका को पीएम मोदी के चीन दौरे से कोई चिंता है क्या?
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इस पर उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका का रणनीतिक साझेदार है. दोनों देशों के बीच कई बार विचारों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन संवाद और बातचीत के ज़रिए इन्हें दूर किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी चिंताओं को लेकर हमेशा स्पष्ट रुख अपनाया है. चाहे वो रूस से तेल की खरीद हो या व्यापार असंतुलन.
क्या चीन के करीब जा रहा भारत?
जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या भारत जैसे ब्रिक्स देश (Brazil, Russia, India, China, South Africa) अमेरिका के खिलाफ एकजुट होकर ट्रेड वॉर में नेतृत्व करना चाहते हैं? इस पर अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि भारत के साथ बातचीत जारी रहेगी और आपसी मतभेद सीधे और ईमानदारी से की गई बातचीत से ही सुलझाए जा सकते हैं.
अमेरिका की असली चिंता क्या है?
अमेरिका को इस बात की चिंता है कि भारत, चीन और रूस के साथ नज़दीकियां बढ़ाकर कहीं अमेरिका से दूरी न बना ले. खासतौर से रूस से सस्ते तेल की खरीद और ट्रेड असंतुलन को लेकर अमेरिका कई बार अपनी नाराजगी जाहिर कर चुका है. अमेरिका ने कहा है कि भारत एक अहम साझेदार है और मतभेदों को बातचीत के ज़रिए सुलझाया जाएगा. पीएम मोदी का चीन दौरा कूटनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है और इस पर दुनिया की निगाहें टिकी हैं.