Ram Mandir: विवाह पंचमी के अवसर पर अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 58 मिनट पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जैसे ही धर्मध्वज की डोरी खींची, ध्वज भगवान राम मंदिर के स्वर्ण मंडित कलश की ओर बढ चला।161 फीट की ऊंचाई पर पर पहुंचे इस ध्वज पर सूर्य और ऊं, अंकित है। ध्वज पर रामराज्य का प्रतीक कोविदार वृक्ष भी अंकित है। प्रधानमंत्री मोदी जब तक ध्वज कलश पर पहुंच कर लहरा नहीं गया तब तक उसे एकटक हाथ जोडे निहारते ही रहे। खुशी-आह्लाद में उनके जुडे हुए हाथ कांप रहे थे। मंदिर परिसर में उपस्थित सभी संत महात्मा, आम जनमानस सभी खडे होकर हाथ जोडकर धर्मध्वज को नमन कर रहे थे और जयकारे लगाते रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के धर्मध्वजा का प्रतीक प्रधानमंत्री को भेंट किया।
"10 वर्षों के भीतर गुलामी की मानसिकता से मुक्त करना होगा"
इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सम्बोधन में अगले 10 वर्षों में भारत को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करवाने का लक्ष्य दिया है। उन्होंने कहा कि गुलामी की मानसिकता से पूरी तरह मुक्ति पानी ही होगी। उन्होंने कहा कि आज से 190 साल पहले साल 1835 में मैकाले नाम के एक अंग्रेज ने भारत को अपनी जडों से उखाडने के बीज बोए थे, मानसिक गुलामी की नींव रखी थी। 10 साल बाद उस अपवित्र घटना के 200 साल पूरे हो रहे हैं। हमे आने वाले 10 वर्षों के भीतर गुलामी की मानसिकता से मुक्त करना ही होगा।
"भारत लोकतंत्र की जननी है"
मैकाले ने जो कुछ सोचा था, उसका प्रभाव कहीं व्यापक हुआ है, हमें आजादी मिली मगर हीन भावना से मुक्ति नहीं मिली। हममें विकार आ गया कि विदेश की हर चीज अच्छी है, हमारे देश की हर चीज बेकार है। कहा गया है कि हमारा संविधान विदेश से प्रेरित है जबकि हकीकत यह है कि भारत लोकतंत्र की जननी है। हमारी व्यवस्था के हर कोने में गुलामी की मानसिकता ने डेरा डाला हुआ है। हमने अपनी नवसेना के ध्वज से गुलामी के चिन्हों का हटाया है। यह मानसिकता बदलने का क्षण है। यह वह घोषणा थी कि भारत अब अपनी शक्ति, अपने प्रतीकों के साथ आगे बढेगा, यह गुलामी की मानसिकता ही है जिसने इतने वर्षों तक रामत्व को नकारा है। गुलामी की मानसिकता इतनी हावी हो गयी कि प्रभु राम के अस्तित्व को भी नकारा गया है। अगर हम यह ठान ले कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने से कोई रोक नहीं पाएगा। वह दिन दूर नहीं जब भारत विश्व की तीसरी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। इस संकल्प को साकार करने में भगवान राम ही हमारी प्रेरणा बनेंगे। हमें रामराज्य से प्रेरित भारत बनाना है।
#WATCH अयोध्या, उत्तर प्रदेश: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "आने वाली सदियां और सहस्र शताब्दियों तक ये धर्म ध्वज प्रभु राम के आर्दशों और सिद्धांतों का उद्घोष करेगा,ये धर्म ध्वज आह्वान करेगा कि सत्य की जीत होती है असत्य की नहीं। ये धर्म ध्वज उद्घोष करेगा कि सत्य ही ब्रह्म का… pic.twitter.com/zl0u1Mti0n
— ANI_HindiNews (@AHindinews) November 25, 2025
"भगवा धर्म से ही विश्व ठीक चलेगा"
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघ चालक डा मोहन भागवत ने कहा कि सारा विश्व जिससे ठीक चलेगा, परिवार समाज ठीक चलेगा। वह धर्म, उस धर्म का प्रतीक भगवा है। आज हम सबके लिए एक सार्थकता का दिवस है। इतने लोगों ने सपना देखा, इतने लोगों ने अपने प्राण अर्पण किये, आज उनकी आत्मा संतुष्ट हुई हो गयी। आज अशोक सिंघल, महंत रामचन्द्र दास, जगमोहन डालमिया जैसोे का अभियान पूरा हुआ। रामराज्य का ध्वज जो कभी अयोध्या में फहराता था, आज वही ध्वज नीचे से शिखर पर चढता हुआ हमने आज अपनी आंखों से देखा, इसी देह ने देखा। ध्वज प्रतीक होता है। इस मंदिर के धर्मध्वज के रूप में हमने कुछ तत्वों को ऊपर चढाया। यह धर्मध्वज है। हिन्दु समाज ने लगातार पांच सौ साल ओर उसके बाद मंदिर आन्दोलन में अपने स्वत्व को सिद्ध किया और मंदिर बन गया। यह आज हमारी कृतार्थता का दिवस है, संकल्प का दिवस है।
"यह एक नये युग का आरम्भ है"
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना सम्बोधन दोपहर 12 बजकर 05 मिनट पर शुरु किया। उन्होंने कहा कि यह एक नये युग का आरम्भ है। इस अवसर पर भारत के भाग्य को वैश्विक मंच पर पहुचाने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का उन्होंने हृदय से स्वागत किया।
उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं संघ के सरसंघ चालक मोहन भागवत, प्रदेश की राज्यपाल आंनदीबेन पटेल, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र के महंत नृत्यगोपाल दास, महंत गोविन्द गिरी का उन्होंने स्वागत किया। उन्होंने कहा कि प्रभुश्री राम का यह मंदिर 140 करोड भारतीयों की आस्था व सम्मान का प्रतीक है। इस मंदिर के निर्माण में सहयोग देने वाले सभी कर्मयोगियों का भी उन्होंने स्वागत किया। राम मंदिर आन्दोलन के दौरान अपना जीवन समर्पित करने वालों को भी योगी नहीं भूले। उन्होंने कहा कि रामराज्य के मूल्य कालजयी हैं। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का श्रेय राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को देते हुए कहा कि जब कमान संघ के हाथों में आयी तब यह आन्दोलन तेज गति से आगे बढा।
"विकसित भारत के संकल्प का प्रतीक"
श्रीराम मंदिर पर लहराता यह केसरिया ध्वज सत्य, न्याय, राष्ट्र प्रेम और विकसित भारत के संकल्प का प्रतीक है। विरासत और विकास का समन्वय भारत को अब एक नयी ऊंचाई प्रदान कर रहा है। पिछले पांच सौ वर्षों मे साम्राज्य बदले, पीढिया बदलीं मगर आस्था बनी रही। जब एक समय था जब यह अयोध्या संघर्ष, बदहाली का शिकार थी मगर आज यही अयोध्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देशन में आस्था व अध्यात्म की वैश्विक राजधानी बन गयी है। महर्षि वाल्मीकि के नाम पर बना अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट विश्व को बेहतर कनेक्वटिविटी उपलब्ध करवा रहा है। देश का पहला सोलर सिटी भी अयोध्या बन चुका है।