
Modi's relationship sours: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिश्तों में हाल के दिनों में काफी तल्खी देखने को मिली है। शुरुआत उस समय हुई जब ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर का श्रेय खुद को दिया, जबकि भारत ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। यही नहीं, ट्रंप ने इस मुद्दे पर 40 से ज्यादा बार दावा दोहराया, जिससे दोनों नेताओं के बीच दूरी बढ़ी। इसके बाद ट्रंप ने नाराजगी जताई कि भारत ने उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट नहीं किया, जबकि पाकिस्तान और कुछ अन्य देशों ने ऐसा किया था। वहीं, कनाडा में हुए G7 समिट में भी दोनों नेताओं की सीधी मुलाकात नहीं हो पाई और बातचीत फोन पर ही सीमित रह गई।
कश्मीर और व्यापार पर मतभेद
मोदी ने फोन पर साफ कर दिया कि भारत कश्मीर मुद्दे पर किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं चाहता। ट्रंप की इस पेशकश ने मतभेद और गहरे कर दिए। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत को “डेड इकोनॉमी” कहकर निशाना साधा और भारतीय सामानों पर 50% टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। इसी बीच, अमेरिका लगातार दबाव डाल रहा था कि भारत अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पादों पर टैरिफ कम करे, लेकिन भारत ने घरेलू किसानों के हितों को प्राथमिकता दी। नतीजतन, दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते की बातचीत अधर में लटक गई।
रूसी तेल खरीद पर बढ़ा विवाद
तनाव की एक और बड़ी वजह रूस से भारत का तेल आयात है। अमेरिका चाहता था कि भारत इस खरीद को रोके, लेकिन भारत ने इसे अपने राष्ट्रीय हित से जुड़ा मामला बताया। नतीजतन, ट्रंप प्रशासन ने भारत पर अतिरिक्त 25% पेनल्टी टैरिफ भी लगा दिया। इस कदम से दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्ते और बिगड़ गए। अमेरिका चाहता है कि यूरोपीय देश भी भारत पर इसी तरह का दबाव डालें, लेकिन यूरोपीय यूनियन ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली है। कुल मिलाकर, सीजफायर का क्रेडिट लेने से लेकर व्यापार और ऊर्जा नीति तक, कई मुद्दों ने ट्रंप और मोदी के रिश्तों को तनावपूर्ण बना दिया है।