Gen-Z Youth Politics : आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में Gen-Z और Gen-Alpha युवाओं से संवाद कर नई चर्चा छेड़ दी है। इस कार्यक्रम में उन्होंने युवाओं के सवालों का जवाब दिया और समाज, राष्ट्र तथा लोकतंत्र में उनकी भूमिका पर बात की। उनके बयान को केवल एक संवाद कार्यक्रम नहीं बल्कि भविष्य की राजनीतिक और सामाजिक दिशा से जोड़कर देखा जा रहा है।
युवाओं को दिया बड़ा संदेश
भागवत ने कहा कि युवाओं को अपनी बात रखने और विरोध दर्ज करने का अधिकार है। उन्होंने नई पीढ़ी को समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने और सकारात्मक बदलाव का हिस्सा बनने का संदेश दिया। इससे यह संकेत गया कि संघ अब युवाओं से सीधे संवाद बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
क्यों है यह कार्यक्रम अहम?
देश में युवा मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2027 के चुनावी माहौल को देखते हुए राजनीतिक दलों के साथ-साथ वैचारिक संगठनों की नजर भी युवाओं पर है। ऐसे में भागवत का यह संवाद खास महत्व रखता है क्योंकि इसे नई पीढ़ी तक पहुंच बनाने की कोशिश माना जा रहा है।
बीजेपी और संघ के लिए क्या मायने?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संघ और बीजेपी के बीच वैचारिक संबंध लंबे समय से रहे हैं। ऐसे में युवाओं के बीच संघ की सक्रियता को भविष्य की राजनीति के नजरिए से भी देखा जा रहा है। इससे युवा वर्ग के साथ संवाद और संपर्क मजबूत करने का प्रयास दिखाई देता है।
विपक्ष की नजर भी इस पर
विपक्षी दल इस तरह के कार्यक्रमों को राजनीतिक दृष्टि से देख सकते हैं, जबकि संघ समर्थकों का कहना है कि यह समाज और राष्ट्र निर्माण से जुड़ा सामान्य संवाद है। हालांकि कार्यक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा तेज हो गई है।
इसे भी पढ़ें : Messi को बम से उड़ाने की धमकी, Ronaldo भी निशाने पर! वर्ल्ड कप की सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल
आगे क्या?
2027 के चुनाव से पहले युवा वोटर सबसे अहम वर्ग माना जा रहा है। ऐसे में मोहन भागवत का यह संवाद सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं बल्कि आने वाले समय की राजनीतिक और वैचारिक रणनीतियों का संकेत भी माना जा रहा है। यही वजह है कि इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक गलियारों की नजर बनी हुई है।