Mohan Bhagwat says: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मुंबई के नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम में युवाओं से संवाद करते हुए शिक्षा, लोकतंत्र, रोजगार, आरक्षण, सोशल मीडिया, समलैंगिक विवाह और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे। देशभर से आए विद्यार्थियों के बीच उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी की बात सुनना और उसके साथ संवाद बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक है। उन्होंने Gen Z और Gen Alpha को ईमानदार पीढ़ी बताते हुए उनके सवालों और असंतोष को गंभीरता से लेने की बात कही।
Gen Z से संवाद और लोकतांत्रिक अधिकार पर जोर
डॉ. भागवत ने कहा कि यदि युवा अपनी बात रखने के लिए आंदोलन करते हैं तो उसे केवल विरोध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, लोकतंत्र में संवाद और शांतिपूर्ण आंदोलन दोनों अपनी बात रखने के वैध माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी पीढ़ी को बिना सुने एंटी नेशनल कहना उचित नहीं है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताते हुए उन्होंने कहा कि आज के युवा हर विषय पर तार्किक उत्तर चाहते हैं और समाज को उनकी जिज्ञासाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने संविधान के दायरे में रहकर संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पालन करने पर भी जोर दिया।
शिक्षा, रोजगार और सोशल मीडिया पर दी सलाह
संघ प्रमुख ने कहा कि रोजगार का अर्थ केवल सरकारी या निजी नौकरी तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्यमिता, कौशल और श्रम आधारित कार्य भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने श्रम के सम्मान को समाज में फिर से स्थापित करने की आवश्यकता बताई और कहा कि युवाओं को नए अवसरों की ओर भी ध्यान देना चाहिए। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों की जिम्मेदारी अधिक होती है। साथ ही उन्होंने डीपफेक जैसी तकनीकों से सावधान रहने और किसी भी जानकारी पर विश्वास करने से पहले विश्वसनीय स्रोतों से उसकी पुष्टि करने की सलाह दी।
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आरक्षण, विवाह और सामाजिक बदलाव पर विचार
डॉ. भागवत ने कहा कि आरक्षण सामाजिक भेदभाव दूर करने का माध्यम है और जब तक भेदभाव रहेगा, इसकी आवश्यकता बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को आरक्षण का लाभ मिल चुका है, उन्हें समाज के अन्य जरूरतमंद वर्गों को आगे बढ़ाने की भावना रखनी चाहिए। समलैंगिक विवाह के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि LGBTQIA+ समुदाय समाज का हिस्सा है और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि विवाह व्यवस्था में किसी बड़े बदलाव से पहले समाज में व्यापक चर्चा और सहमति आवश्यक है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक समरसता पर संदेश
कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान, आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवालों पर डॉ. भागवत ने कहा कि संघर्ष और आतंकवाद जैसी परिस्थितियों में अलग तरह की चुनौतियां सामने आती हैं, जिनका सामना राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर करना होता है। उन्होंने कहा कि समाज में एकता, संवाद और विश्वास की भावना मजबूत होनी चाहिए। उनके अनुसार, शिक्षा, सामाजिक समरसता, श्रम के सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देकर देश की नई पीढ़ी को बेहतर भविष्य के लिए तैयार किया जा सकता है।