राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक Mohan Bhagwat ने वृंदावन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जनसंख्या नीति, धर्मांतरण और घुसपैठ जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि परिवार में तीन बच्चों का होना संतुलित समाज और बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। साथ ही उन्होंने जनसंख्या नीति पर पुनर्विचार और सभी नागरिकों के लिए समान नियम लागू करने की बात भी कही।
तीन बच्चों वाला परिवार क्यों बताया बेहतर
वृंदावन में अपने संबोधन के दौरान मोहन भागवत ने कहा कि जनसंख्या शास्त्र और मानस शास्त्र दोनों के अनुसार तीन बच्चों वाला परिवार अधिक संतुलित होता है। उनके मुताबिक इससे माता-पिता और बच्चों के बीच बेहतर सामंजस्य बनता है और मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। उन्होंने यह भी कहा कि कम जन्मदर भविष्य में सामाजिक असंतुलन पैदा कर सकती है।
जनसंख्या नीति पर पुनर्विचार की मांग
भागवत ने कहा कि देश की मौजूदा जनसंख्या नीति पर गंभीरता से दोबारा विचार करने की जरूरत है। उनका मानना है कि यदि जन्मदर 2 या उससे नीचे चली जाती है तो यह देश के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति बन सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि आने वाले 50 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई नीति बनाई जानी चाहिए, जो सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू हो।
धर्मांतरण को लेकर भी रखी बात
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने धर्मांतरण के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। भागवत ने कहा कि जो लोग पहले हिंदू थे और बाद में अन्य धर्मों में चले गए हैं, उन्हें वापस जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने इस विषय को सामाजिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए, लेकिन समाज की मूल पहचान को भी बनाए रखना जरूरी है।
घुसपैठ पर सख्ती की अपील
भागवत ने अवैध घुसपैठ को देश के लिए एक गंभीर चुनौती बताते हुए समाज और प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यदि कहीं भी घुसपैठ की जानकारी मिले तो तुरंत अधिकारियों को सूचित किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे लोगों को रोजगार देने से बचना चाहिए, ताकि अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।
अन्य नेताओं ने भी किया समर्थन
इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए Indresh Kumar ने कहा कि जनसंख्या का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विचार किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए है। वहीं Avimukteshwaranand Saraswati के एक विवादित बयान पर भी उन्होंने असहमति जताते हुए उसे भ्रामक और अनुचित बताया।