मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में हुई डॉ. मोहन यादव सरकार की कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसलों पर मुहर लगी है। सरदार सरोवर परियोजना से विस्थापित हजारों आदिवासी परिवारों को बड़ी राहत देते हुए उनके आवासीय पट्टों की निःशुल्क रजिस्ट्री कराने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही दो नई सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी, सामाजिक योजनाओं की निरंतरता और प्रशासनिक बदलावों पर भी सहमति बनी है।
विस्थापित आदिवासियों को स्थायी अधिकार
कैबिनेट ने सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित 25,602 आदिवासी परिवारों के लिए बड़ा कदम उठाया है। इन परिवारों को पहले आवासीय पट्टे दिए जा चुके थे, लेकिन अब तक उनकी रजिस्ट्री नहीं हो सकी थी। सरकार ने निर्णय लिया है कि इन सभी आवासों की रजिस्ट्री पूरी तरह निःशुल्क कराई जाएगी, जिससे प्रभावित परिवारों को जमीन और मकान पर कानूनी अधिकार मिल सकेंगे और वे भविष्य की योजनाओं का लाभ भी ले पाएंगे।
दो सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी
कृषि क्षेत्र को मजबूती देने के उद्देश्य से कैबिनेट ने धनवाही और बरही नामक दो सिंचाई परियोजनाओं को स्वीकृति दी है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से आसपास के क्षेत्रों में खेती के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और किसानों की उत्पादकता में सुधार होगा। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
योजनाओं की निरंतरता और वित्तीय भार
वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक कई विभागों की प्रमुख योजनाओं को जारी रखने का फैसला किया गया है। संबल योजना, पशु विकास कार्यक्रम, किशोर कल्याण निधि, महिला पीड़ित सहायता योजना और उद्यम योजना जैसी पहलों को अगले चार वर्षों तक जारी रखा जाएगा। इन योजनाओं से सरकार पर लगभग 15,009 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा, लेकिन इससे सामाजिक सुरक्षा और स्वरोजगार को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
प्रशासनिक बदलाव और कर्मचारियों का संविलियन
राज्य समाज कल्याण बोर्ड को भंग कर उसके कर्मचारियों का संविलियन महिला एवं बाल विकास विभाग में करने की स्वीकृति दी गई है। सरकार का कहना है कि इससे कामकाज में बेहतर समन्वय बनेगा और योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। यह कदम प्रशासनिक ढांचे को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
अन्य उपलब्धियां और नई पहलें
बैठक में प्रदेश की हालिया पहलों पर भी चर्चा हुई। भावांतर योजना को पूरी तरह लागू करने और भुगतान दो माह के भीतर करने की जानकारी दी गई। इसके अलावा 29 जनवरी को पशुपतिनाथ लोक के लोकार्पण और भोपाल में आयोजित पुष्प महोत्सव का उल्लेख किया गया, जिसे किसानों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से एक नई पहल के रूप में देखा जा रहा है।