मध्यप्रदेश की मोहन सरकार की विशेष कैबिनेट बैठक पचमढ़ी के राजभवन में संपन्न हुई। यह बैठक गोंड वीर राजा भभूत सिंह को समर्पित रही, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ गोरिल्ला युद्ध लड़ा और नर्मदा अंचल के शिवाजी कहे गए। बैठक में कई ऐतिहासिक और विकासपरक फैसले लिए गए—जिनमें पचमढ़ी वन्यजीव अभ्यारण्य का नाम बदलने से लेकर श्रम कानूनों में संशोधन, आईआईटी इंदौर में एग्रो हब और इंदौर-उज्जैन मेट्रो परियोजना शामिल है।
राजा भभूत सिंह के नाम पर होगा पचमढ़ी वन्यजीव अभ्यारण्य
कैबिनेट बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि पचमढ़ी वन्यजीव अभ्यारण्य अब राजा भभूत सिंह के नाम से जाना जाएगा। गोंड राजा भभूत सिंह ने इस क्षेत्र में शासन, संस्कृति और सुरक्षा के लिए बहुमूल्य योगदान दिया था।
श्रम विभाग में बड़ा बदलाव: महिलाएं कर सकेंगी नाइट शिफ्ट
कैबिनेट ने श्रम कानूनों में संशोधन को मंजूरी दी है। महिलाओं को सुरक्षित स्थानों पर रात्रिकालीन शिफ्ट में काम करने की अनुमति दी जाएगी। साथ ही, ठेका श्रमिकों के लिए भी नियमों में बदलाव किया जाएगा ताकि शोषण की संभावनाओं को खत्म किया जा सके।
राजस्व विभाग में 1200 नए पदों का सृजन
राजस्व विभाग में 500 पद समाप्त कर 1200 नए पद सृजित किए जाएंगे। विशेष रूप से आईटी विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाएगी ताकि सीमांकन और नामांतरण जैसी सेवाएं डिजिटल और पारदर्शी तरीके से हों।
इंदौर IIT में बनेगा एग्रो टेक्नोलॉजी हब
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए, इंदौर स्थित IIT में एग्रो टेक हब की स्थापना का फैसला लिया गया है। इससे कृषि क्षेत्र में नवाचार और स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिलेगा।
इंदौर-उज्जैन के बीच मेट्रो ट्रेन परियोजना
2028 में सिंहस्थ से पहले इंदौर और उज्जैन के बीच मेट्रो ट्रेन चलाई जाएगी। यह परियोजना दोनों शहरों के बीच यात्रा को तेज़, सुगम और पर्यावरण के अनुकूल बनाएगी।
अन्य प्रमुख फैसले
5 जून को उज्जैन में वेलनेस समिट का आयोजन
7 जून को डिंडौरी के बजाग में जनजातीय सम्मेलन
9 जून को पीएम मोदी के कार्यकाल के 11 साल पूर्ण होने पर कार्यक्रम
तहसीलदारों की जिम्मेदारियों को दो हिस्सों में विभाजित करने का फैसला
राजस्व कमिश्नर और लैंड रिकॉर्ड कमिश्नर के पद एक किए जाएंगे
राजा भभूत सिंह: नर्मदा अंचल के शिवाजी
राजा भभूत सिंह ने पचमढ़ी की पहाड़ियों में अंग्रेजों के खिलाफ गोरिल्ला युद्ध लड़ा और अपनी संस्कृति, समाज और क्षेत्र की रक्षा की। उनकी वीरता और रणनीति की तुलना छत्रपति शिवाजी से की जाती है। पचमढ़ी उनके शासन और संघर्ष का ऐतिहासिक केंद्र रहा है।