मध्य प्रदेश में मोहन सरकार के दो वर्ष पूरे होने से पहले विभागीय कामकाज का बड़ा आकलन शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तीन दिनों तक अलग-अलग विभागों की समीक्षा करेंगे, जिसमें मंत्रियों को अपने दो साल के काम, योजनाओं की प्रगति और आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना विस्तार से प्रस्तुत करनी होगी। यह अभ्यास सरकार के अगले कार्यकाल की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है, जिसमें पारदर्शिता और जवाबदेही सबसे प्रमुख फोकस है।
मंगलवार से शुरू हुआ समीक्षा का मैराथन
मंगलवार को विधानसभा में आयोजित बैठकों में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास, स्कूल शिक्षा, नर्मदा घाटी विकास, जल संसाधन और ऊर्जा विभागों की समीक्षा की।
दोपहर 2 बजे से 5 बजे तक चली बैठकों में संबंधित विभागीय मंत्री मौजूद रहे।
प्रत्येक मंत्री को अपने विभाग के दो साल के कामकाज का विस्तृत विवरण देना पड़ा।
ऊर्जा एवं नवीकरणीय ऊर्जा पर विशेष रूप से प्रगति और कमियों की चर्चा की गई।
बुधवार को स्वास्थ्य, सहकारिता और महिला-बाल विकास पर फोकस
दूसरे दिन वल्लभ भवन में मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, सहकारिता, महिला एवं बाल विकास, पिछड़ा वर्ग, सामाजिक न्याय और कृषि विभाग की समीक्षा ली।
स्वास्थ्य विभाग को आगामी वर्षों की प्राथमिकताओं पर स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
कृषि विभाग की ओर से फसल विविधीकरण और किसानों के हित में नई योजनाओं को लेकर प्रेजेंटेशन दिया गया।
सामाजिक न्याय विभाग को विकलांगजन कल्याण योजनाओं के विस्तार पर रिपोर्ट देनी पड़ी।
खजुराहो में होगा तीसरे चरण का बड़ा मूल्यांकन
8 और 9 दिसंबर को समीक्षा का अंतिम चरण खजुराहो में आयोजित होगा, जहां खाद्य, वाणिज्यिक कर, पशुपालन, नगरीय विकास, जनजातीय कार्य, MSME, लोक निर्माण और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग अपना रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत करेंगे।
नगरीय विकास विभाग से शहरों में सफाई, परिवहन और स्मार्ट अवसंरचना पर अपडेट मांगा जाएगा।
जनजातीय विभाग से शिक्षा, आवास और जनकल्याण योजनाओं की प्रगति पूछी जाएगी।
अंत में मुख्यमंत्री कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता भी करेंगे, जिसमें आगे की रणनीति तय होगी।