धार्मिक आस्थाओं के केंद्र बनेंगे विकास के मंच, मोहन सरकार का अभिनव प्रयोग । मध्यप्रदेश की मोहन सरकार अब कैबिनेट बैठकों को धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों से जोड़ने की नई पहल कर रही है। इसका उद्देश्य केवल मंत्रणा करना नहीं, बल्कि जनभावनाओं से सीधा जुड़ाव बनाना और स्थानीय विकास को रफ्तार देना है। अब श्रीराम से जुड़े चित्रकूट और श्रीकृष्ण से जुड़े सादिपनि आश्रम जैसे पवित्र स्थलों पर प्रदेश के अहम निर्णय लिए जाएंगे। यह प्रयोग धार्मिक आस्था, पर्यटन, रोजगार और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का मिश्रण बनकर सामने आ रहा है।
अब तीर्थ स्थलों से होंगे जनकल्याण के फैसले
मुख्यमंत्री मोहन यादव की अगुवाई में राज्य सरकार 40 से अधिक धार्मिक स्थलों पर ‘डेस्टिनेशन कैबिनेट’ की योजना बना रही है। सूची में उज्जैन (महाकाल नगरी), अमरकंटक (नर्मदा उद्गम), मुलताई (ताप्ती उद्गम), ओंकारेश्वर, भोजपुर, सलकनपुर, जानापाव, हनुवंतिया जैसे महत्वपूर्ण नाम शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन स्थलों से लिए गए निर्णयों से न केवल जनविश्वास बढ़ेगा बल्कि पर्यटन और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।
पहले भी हुई हैं ऐतिहासिक बैठकें
मोहन सरकार ने अब तक चार डेस्टिनेशन कैबिनेट बैठकें की हैं – दमोह (सिंग्रामपुर), महेश्वर, इंदौर (राजबाड़ा) और पचमढ़ी में। अब अगली बैठकें उन स्थलों पर होंगी जो धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
पर्यटन, रोजगार और परंपरा का मिलन
सरकार की यह योजना धार्मिक पर्यटन को एक नई दिशा देगी। जहां एक ओर तीर्थ स्थलों का प्रचार-प्रसार होगा, वहीं स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे। छोटे दुकानदार, गाइड्स, टूर ऑपरेटर और हस्तशिल्पी लाभान्वित होंगे। सरकार का उद्देश्य है कि लोग अपने ही प्रदेश के धार्मिक स्थलों से गहराई से जुड़ें और उन्हें आत्मीयता से जानें।