मध्य प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अगुवाई वाली सरकार में जल्द ही मंत्रिमंडल स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। दो साल के कार्यकाल की परफॉर्मेंस रिपोर्ट के आधार पर मंत्रियों के कामकाज का आकलन किया गया है। इस समीक्षा में जहां कुछ मंत्री बेहतर प्रदर्शन के साथ उभरे हैं, वहीं कई चेहरे कमजोर परफॉर्मेंस के चलते रडार पर आ गए हैं।
परफॉर्मेंस रिपोर्ट बनी फैसला का आधार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में विभागवार समीक्षा बैठक की, जिसमें मंत्रियों के कामकाज का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। सूत्रों के मुताबिक, योजनाओं के क्रियान्वयन, नवाचार, जनसंपर्क और विभागीय मॉनिटरिंग जैसे मानकों पर रिपोर्ट तैयार की गई है। इस रिपोर्ट में जिन मंत्रियों का प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा, उन्हें सुधार के संकेत दे दिए गए हैं। माना जा रहा है कि आगे की समीक्षा के बाद तीन से चार मंत्रियों की मंत्रिमंडल से छुट्टी हो सकती है।
बेहतर प्रदर्शन करने वाले मंत्री
समीक्षा में कुछ मंत्रियों का कामकाज संतोषजनक और प्रभावी पाया गया है। उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला के विभागीय प्रबंधन को स्थिर और परिणाम देने वाला माना गया। पर्यटन और संस्कृति विभाग में किए गए प्रयासों के लिए धर्मेंद्र सिंह लोधी की सराहना हुई। वहीं, तुलसीराम सिलावट के विभाग में नवाचारों को सकारात्मक रूप से देखा गया। कौशल विकास क्षेत्र में गौतम टेटवाल के प्रयासों और पीएम पार्क जैसी पहलों को भी सराहना मिली। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल का काम भी संतुलित माना गया।
कमजोर प्रदर्शन वालों पर सख्ती
कुछ मंत्रियों के लिए यह रिपोर्ट चेतावनी की तरह सामने आई है। दिलीप अहिरवार को टार्गेट आधारित कामकाज के लिए नए निर्देश दिए गए हैं। नारायण सिंह पंवार के विभाग में मॉनिटरिंग को कमजोर माना गया। नागर सिंह चौहान पर अनुसूचित जाति कल्याण विभाग में ठोस नवाचार न ला पाने की टिप्पणी की गई। जनजातीय विभाग संभाल रहे विजय शाह को न केवल कामकाज सुधारने के संकेत मिले हैं, बल्कि विवादित बयानों के कारण भी सरकार की नाराजगी झेलनी पड़ी है।
संगठन की नाराजगी भी कारण
राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के मामले में राजनीतिक और संगठनात्मक असहजता की बात सामने आई है। पारिवारिक विवाद से जुड़े मामलों ने सरकार और संगठन दोनों को असंतुष्ट किया है। ऐसे मामलों को भी परफॉर्मेंस के साथ जोड़ा जा रहा है।
2026 से पहले कैबिनेट विस्तार की तैयारी
सरकार की रणनीति साफ है—2026 से पहले प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर टीम को मजबूत करना। खराब परफॉर्मेंस वालों की जगह नए और वरिष्ठ विधायकों को मौका दिया जा सकता है। आने वाले दिनों में एक और समीक्षा बैठक के बाद तस्वीर और साफ होने की संभावना है।