मिडिल ईस्ट की राजनीति इन दिनों काफी गर्म हो गई है। ईरान में नए सुप्रीम लीडर के रूप में मोजतबा खामेनेई के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। उनके पिता और लंबे समय तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे अली खामेनेई की मौत के बाद देश की सबसे ताकतवर जिम्मेदारी अब उनके हाथों में आ गई है। सुप्रीम लीडर का पद ईरान की राजनीति में सबसे बड़ा माना जाता है और सेना से लेकर विदेश नीति तक हर बड़े फैसले में अंतिम अधिकार उसी के पास होता है।
पिता की मौत के बाद संभाली बड़ी जिम्मेदारी
रिपोर्ट्स के अनुसार अली खामेनेई की मौत के बाद सत्ता का पूरा केंद्र मोजतबा खामेनेई के पास आ गया। 56 साल के मोजतबा को अब ईरान की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था का सबसे प्रभावशाली चेहरा माना जा रहा है। उनके नेतृत्व में ईरान का रुख पहले से ज्यादा सख्त दिखाई देने लगा है। यही कारण है कि उनके सत्ता में आते ही दुनिया के कई देशों की नजरें ईरान की नई रणनीति पर टिक गई हैं।
अमेरिका ने घोषित किया बड़ा इनाम
इसी बीच अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाते हुए मोजतबा खामेनेई पर इनाम घोषित कर दिया। अमेरिकी विदेश विभाग ने उनके बारे में अहम जानकारी देने वाले व्यक्ति के लिए करीब 10 मिलियन डॉलर यानी लगभग 80 करोड़ रुपये के इनाम की घोषणा की है। यह इनाम अमेरिका के एक विशेष कार्यक्रम के तहत घोषित किया गया है। इस घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
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ईरान के कई नेताओं को भी सूची में शामिल किया
अमेरिका ने केवल मोजतबा खामेनेई का नाम ही नहीं लिया बल्कि ईरान के कई बड़े नेताओं को भी अपनी वांछित सूची में शामिल किया है। इनमें अली लारिजानी, अली असगर हेजजी, याह्या रहीम सफवी, गृह मंत्री स्कंदर मोमेनी और खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब जैसे नाम बताए जा रहे हैं। अमेरिका का आरोप है कि ये सभी लोग मिडिल ईस्ट क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियों से जुड़े हुए हैं।
ईरान ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
दूसरी तरफ ईरान इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा है। ईरान का कहना है कि वह किसी भी तरह की अशांति फैलाने में शामिल नहीं है बल्कि केवल अपनी सुरक्षा और अपने सहयोगियों की रक्षा कर रहा है। ईरान का यह भी कहना है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश इस मुद्दे को राजनीतिक रूप दे रहे हैं।
स्वास्थ्य को लेकर भी चल रही हैं अटकलें
इसी बीच मोजतबा खामेनेई को लेकर एक और चर्चा सामने आई है। कुछ विदेशी रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि हाल के हमलों में वह घायल हुए थे और उनका इलाज तेहरान के एक अस्पताल में चल रहा है। हालांकि इन खबरों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। दिलचस्प बात यह भी है कि सुप्रीम लीडर बनने के बाद वह अभी तक सार्वजनिक मंच पर नजर नहीं आए हैं, जिससे उनकी सेहत को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।