बिहार चुनावी नतीजों के बीच सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं मोकामा ने, जहां छोटे सरकार यानी अनंत सिंह ने जेल में रहते हुए भी जीत की ओर बढ़ रहे हैं, बता दें सुबह जैसे ही काउंटिंग शुरू हुई, मोकामा से लेकर पटना तक ढोल–नगाड़ों की आवाज गूंजने लगी और समर्थक नाचते हुए कहते दिखे जेल का फाटक टूटेगा, हमारा शेर छूटेगा. अनंत सिंह भले जेल के अंदर थे, लेकिन उनकी रणनीति बाहर पूरी ताकत के साथ लागू होती दिखी. आरजेडी ने इस सीट को तेजस्वी यादव की सबसे बड़ी उम्मीद माना था, लेकिन शुरुआती रुझानों से ही साफ हो गया कि मोकामा फिर उसी नेता को चुनेगा जिस पर उसने हमेशा भरोसा किया है.
तेजस्वी यादव की सारी रणनीति फेल
वीणा देवी को उतारकर आरजेडी ने इस सीट पर पूरा जोर लगाया था. तेजस्वी यादव ने बड़ी रैलियां कीं, गांव–गांव टीमें भेजीं और महिलाओं को लुभाने की कोशिश की, लेकिन मोकामा का समीकरण शुरू से ही अलग दिखा. स्थानीय लोगों के मुताबिक अनंत सिंह भले विवादों में रहे हों, लेकिन उन्होंने लोगों के सुख–दुख में हमेशा साथ दिया है. यही कारण है कि गिरफ्तारी, केस और विरोधियों की ताकत भी उनकी लोकप्रियता को हिला नहीं सकी. पटना स्थित जेडीयू ऑफिस के बाहर भी NDA समर्थकों का भारी जश्न देखने को मिला, जिसने माहौल साफ कर दिया कि बिहार में इस बार मोदी–नीतीश–योगी का फॉर्मूला पूरी तरह सफल रहा.
महिलाओं के वोट की अहम भूमिका
सबसे महत्वपूर्ण भूमिका महिलाओं के वोट ने निभाई. रिपोर्ट के अनुसार, मोकामा में महिलाओं ने भारी संख्या में मतदान किया और इनमें से बड़ी तादाद अनंत सिंह के पक्ष में गई. स्थानीय महिलाओं ने साफ कहा कि अनंत भैया भरोसेमंद हैं और हर मुश्किल में साथ खड़े रहते हैं. एनडीए की जीत में भी महिलाओं का योगदान ऐतिहासिक रहा, क्योंकि नीतीश कुमार की 20 साल की योजनाओं जीविका दीदी नेटवर्क, छात्राओं को साइकिल योजना, महिला आरक्षण ने उन्हें NDA की तरफ झुका दिया. यही लहर मोकामा में भी देखने को मिली, जिसने तेजस्वी की पूरी रणनीति को ध्वस्त कर दिया.
छोटे सरकार ज़िंदाबाद के नारे गूंज रहे
आखिरी राउंड की गिनती तक मोकामा में खुशी का माहौल चरम पर पहुंच गया। अनंत सिंह के घर के बाहर हजारों की भीड़ जमा हो गई, पटाखे फूटने लगे और ‘छोटे सरकार ज़िंदाबाद’ के नारे पूरे इलाके में गूंज उठे. जानकारों के मुताबिक अनंत सिंह की यह जीत सिर्फ एक सीट नहीं, बल्कि इस बात का प्रतीक है कि मोकामा की राजनीति बाहुबल नहीं, बल्कि व्यक्तिगत भरोसे और वर्षों के प्रभाव से चलती है. NDA की बंपर जीत के साथ छोटे सरकार की जीत ने साफ कर दिया कि चाहे राजनीति कितनी भी करवट क्यों न ले, मोकामा का दिल आज भी अनंत सिंह के साथ ही धड़कता है. अब नजरें इस बात पर हैं कि जेल से उनकी रिहाई कब होगी, जिसका इंतजार समर्थक बेसब्री से कर रहे हैं.