बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में प्रचार जोर पकड़ चुका है, लेकिन मोकामा की गोलीकांड की घटना ने चुनावी माहौल को गर्मा दिया है। जन सुराज पार्टी के समर्थक की हत्या पर अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। प्रशांत किशोर ने इसे जंगलराज की वापसी बताया, जबकि राजद और एनडीए नेताओं ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए। इस बीच, एनडीए ने पटना में अपना ‘संकल्प पत्र’ जारी कर विकास और रोजगार के नए वादे भी किए।
मोकामा हिंसा से गरमाया चुनावी माहौल
मोकामा में दो गुटों के बीच हुई झड़प में जन सुराज समर्थक की हत्या से तनाव फैल गया है। घटना के बाद विपक्ष ने राज्य सरकार पर कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। राजद उम्मीदवार वीणा देवी ने निष्पक्ष जांच की मांग की, जबकि जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर ने कहा कि यह बिहार के पुराने ‘जंगलराज’ की याद दिलाती है।
नेताओं के बयान से बढ़ा सियासी तापमान
घटना पर सांसद पप्पू यादव ने कहा कि जब बाहुबलियों को टिकट दिए जाएंगे, तो हिंसा स्वाभाविक है। वहीं, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने इसे विपक्ष की साजिश बताया। तेजस्वी यादव, वीणा देवी और अन्य विपक्षी नेताओं ने सरकार को कानून-व्यवस्था पर घेरा।
एनडीए का संकल्प पत्र और विकास के वादे
इस बीच, पटना में प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में एनडीए ने अपना संयुक्त ‘संकल्प पत्र’ जारी किया। इसमें युवाओं के लिए रोजगार, अति पिछड़े वर्गों के उत्थान और किसानों के लिए ‘कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि’ जैसी योजनाओं का ऐलान किया गया।
आगे क्या?
बिहार का चुनावी रण अब और तेज होता दिख रहा है। एक ओर विपक्ष मोकामा की घटना को लेकर सत्ता पर हमला कर रहा है, वहीं एनडीए विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाने में जुटा है। अब देखना यह होगा कि जनता किस पर भरोसा जताती है—विकास के वादों पर या सुरक्षा के सवालों पर।