हिंदू धर्म में भगवान शिव को देवों का देव—महादेव कहा गया है। वे सृष्टि के संहारक ही नहीं, बल्कि करुणा और दया के सागर भी हैं। मान्यता है कि सोमवार का दिन भोलेनाथ को विशेष रूप से प्रिय है। जो भी भक्त सच्चे मन से सोमवार के दिन भगवान शिव की आराधना करता है, उसके जीवन से दुख, भय और बाधाएँ स्वतः दूर हो जाती हैं।
क्यों है सोमवार महादेव को प्रिय?
पुराणों में वर्णन मिलता है कि चंद्रदेव ने अपने श्राप से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की कठोर तपस्या सोमवार के दिन की थी। भोलेनाथ ने प्रसन्न होकर चंद्रदेव को अपने मस्तक पर स्थान दिया और कहा कि सोमवार को जो भी भक्त श्रद्धा से उनकी पूजा करेगा, उसके जीवन में शांति और सुख की वृद्धि होगी। तभी से सोमवार शिव पूजा का सबसे शुभ दिन माना जाने लगा।
सोमवार को शिव पूजन की विधि
1. स्नान और व्रत संकल्प: प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और शिव उपवास का संकल्प लें।
2. शिवलिंग का अभिषेक: शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, शहद, दही, घी और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें। इसके बाद स्वच्छ जल से स्नान कराएं।
3. बिल्वपत्र और धतूरा अर्पण: शिव जी को बिल्वपत्र अत्यंत प्रिय है। तीन पत्तों वाला बेलपत्र “ॐ नमः शिवाय” का उच्चारण करते हुए चढ़ाएं।
4. दीपक और धूप प्रज्वलित करें: मंदिर में घी का दीपक जलाएं और धूप अर्पित करें।
5. मंत्र जाप: “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें। यह मंत्र जीवन से नकारात्मकता को दूर करता है।
6. कथा श्रवण और आरती: शिव पुराण का पाठ करें या महादेव की आरती गाएँ।
सोमवार व्रत के लाभ
जो भी भक्त श्रद्धापूर्वक सोमवार का व्रत रखता है, उसे मनचाहा वरदान प्राप्त होता है। अविवाहित युवक-युवतियाँ योग्य जीवनसाथी पाते हैं, वहीं दांपत्य जीवन में मधुरता आती है। मानसिक तनाव, आर्थिक संकट और रोग भी दूर होते हैं। भगवान शिव को प्रसन्न करना कठिन नहीं—वे “भोले” हैं, जो सच्ची भक्ति से तुरंत प्रसन्न हो जाते हैं। सोमवार का दिन उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का सर्वोत्तम अवसर है। बस मन में आस्था हो और हृदय में भक्ति, तो भोलेनाथ का आशीर्वाद सदैव साथ रहेगा।