विदेश मंत्री एस जयशंकर दो दिन के मंगोलिया दौरे पर हैं। इस यात्रा को सिर्फ औपचारिक मुलाकात नहीं माना जा रहा है। मंगोलिया के पास सोना तांबा कोयला और यूरेनियम जैसे बड़े खनिज भंडार हैं। भारत की नजर वहां ऊर्जा सुरक्षा और नए व्यापारिक रास्तों पर है। जयशंकर ने कहा कि यात्रा का मकसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मंगोलिया के राष्ट्रपति उखना खुरेलसुख के बीच हुई पिछली बातचीत की प्रगति को देखना है।
तेल रिफाइनरी परियोजना सबसे अहम
इस दौरे में सबसे बड़ी चर्चा मंगोलिया की तेल रिफाइनरी परियोजना की है। डोर्नोगोवी प्रांत के अल्तानशिरी में बन रही इस रिफाइनरी के लिए भारत ने 1.7 अरब डॉलर की सॉफ्ट लाइन ऑफ क्रेडिट दी है। यह भारत सरकार की विदेश में सबसे बड़ी ऐसी सहायता परियोजनाओं में गिनी जा रही है। रिफाइनरी शुरू होने पर मंगोलिया को तेल उत्पादों के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
भारत को क्या मिल सकता है फायदा
भारत के लिए यह साझेदारी कई मायनों में अहम है। मंगोलिया खनिज संपदा वाला देश है और वहां तांबा सोना कोयला तथा ऊर्जा से जुड़ी कई धातुएं मौजूद हैं। भारत को भविष्य में उद्योग बिजली उत्पादन और स्वच्छ ऊर्जा के लिए इन संसाधनों की जरूरत बढ़ेगी। ऐसे में मंगोलिया के साथ मजबूत रिश्ते भारत को नए विकल्प दे सकते हैं। खासकर यूरेनियम को लेकर दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावना पर नजर है।
यूरेनियम पर क्यों टिकी नजर
भारत अपने नागरिक परमाणु कार्यक्रम के लिए यूरेनियम की जरूरत पूरी करने के लिए कई देशों के साथ साझेदारी बढ़ा रहा है। मंगोलिया को यूरेनियम संसाधनों वाला देश माना जाता है। अगर दोनों देशों के बीच इस दिशा में कोई ठोस समझौता आगे बढ़ता है तो भारत की ऊर्जा जरूरतों को सहारा मिल सकता है। हालांकि यूरेनियम आपूर्ति से जुड़ा कोई अंतिम फैसला या समझौता सामने नहीं आया है।
चीन की मौजूदगी भी बड़ी वजह
मंगोलिया का चीन के साथ बड़ा व्यापारिक रिश्ता है और उसके खनिजों का बड़ा हिस्सा चीन को जाता है। इसलिए भारत की कोशिश सिर्फ व्यापार बढ़ाने की नहीं बल्कि मंगोलिया के साथ भरोसे वाली रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने की भी है। भारत मंगोलिया को विकास परियोजनाओं तकनीक शिक्षा और ऊर्जा सहयोग के जरिए एक भरोसेमंद साझेदार का संदेश देना चाहता है।
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आध्यात्मिक रिश्ते से रणनीतिक साझेदारी तक
जयशंकर ने भारत और मंगोलिया को रणनीतिक साझेदार और आध्यात्मिक भाई-बहन बताया। दोनों देशों के बीच बौद्ध धर्म और सभ्यतागत रिश्तों की पुरानी कड़ी रही है। अब यही रिश्ता तेल रिफाइनरी खनिज ऊर्जा और व्यापार तक बढ़ रहा है। बड़ा सवाल यही है कि क्या मंगोलिया के सोने यूरेनियम और दूसरे खनिजों तक भारत की पहुंच मजबूत होगी। आने वाले समझौते इस सवाल का जवाब तय करेंगे।