मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के दरावरी गांव में एक बंदर की मौत के बाद ग्रामीणों ने ऐसी अनोखी परंपरा निभाई, जिसने सभी को चौंका दिया। न सिर्फ अंतिम यात्रा और अस्थि विसर्जन विधि-विधान से किया गया, बल्कि तेरहवीं का आयोजन कर गांववालों ने लगभग एक लाख रुपए जुटाए और चार हजार से ज्यादा लोगों को भोजन भी कराया।
हाईटेंशन लाइन की चपेट में आई थी जान
दरावरी गांव में 7 नवंबर को एक बंदर अचानक हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। ग्रामीण उसे बचाने की कोशिश करते रहे, भोजन-पानी भी दिया, लेकिन बंदर ने कुछ देर बाद दम तोड़ दिया। घटना से दुखी लोगों ने उसे परिवार के सदस्य की तरह विदाई देने का फैसला किया।
डीजे के साथ निकाली अंतिम यात्रा
अगले दिन गांव में मंदिर परिसर के पास ग्रामीण एकत्र हुए। बंदर के लिए विशेष डोल तैयार कर अर्थी सजाई गई और डीजे की धुन के साथ अंतिम यात्रा निकाली गई। मुक्तिधाम में मंत्रोच्चार के बीच चिता संस्कार किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि बंदर को वे हनुमानजी का रूप मानकर उसकी हर रस्म पूरी श्रद्धा से कर रहे थे।
अस्थि विसर्जन उज्जैन में, दाढ़ी भी मुंडवाई
गांव के पटेल बीरमसिंह ने 11वें दिन पांच पंचों के साथ बंदर की अस्थियां उज्जैन ले जाकर शिप्रा नदी में विसर्जित कीं। इस दौरान उन्होंने अपने परिवार के सदस्य की तरह दाढ़ी-मूंछें भी मुंडवाईं और ‘11वीं’ की रस्म निभाई।
चंदा इकट्ठा कर कराया ‘तेरहवीं’ भोज
तेरहवीं के आयोजन के लिए ग्रामीणों ने मिलकर एक लाख रुपए जुटाए। हलवाई बुलाकर खुले मैदान में लगभग पांच क्विंटल आटे की पूड़ियां, 40 किलो नमकीन, 100 लीटर छाछ से कढ़ी, 180 लीटर तेल और एक क्विंटल शक्कर की नुक्ती तैयार की गई। करीब 4 हजार लोगों ने भोजन कर इस अद्भुत आयोजन में सहभागिता निभाई।