मध्य प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से बारिश की रफ्तार धीमी पड़ने के पीछे मौसम की एक महत्वपूर्ण स्थिति जिम्मेदार मानी जा रही है, जिसे मानसून ब्रेक कहा जाता है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसूनी ट्रफ के अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर खिसकने के कारण प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में वर्षा की गतिविधियां कमजोर हुई हैं। हालांकि, अगले एक सप्ताह के दौरान ट्रफ के सामान्य स्थिति में लौटने की संभावना जताई जा रही है, जिससे बारिश दोबारा तेज हो सकती है।
मानसून ब्रेक क्या होता है?
मानसून के दौरान कई बार ऐसी स्थिति बनती है जब मानसूनी ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति छोड़कर हिमालय की तलहटी के करीब पहुंच जाती है। इसका सीधा असर मध्य और पश्चिमी भारत के राज्यों पर पड़ता है, जहां बारिश की गतिविधियां अचानक कम हो जाती हैं। इसी मौसमीय स्थिति को मानसून ब्रेक कहा जाता है। फिलहाल मध्य प्रदेश में बारिश में आई कमी की मुख्य वजह भी यही मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, जैसे ही ट्रफ दोबारा अपनी सामान्य स्थिति में लौटेगी, प्रदेश में वर्षा का दौर फिर सक्रिय हो सकता है।
अगले सप्ताह बढ़ सकती है बारिश
मौसम विशेषज्ञ डॉ. जी.डी. मिश्रा के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में मानसूनी ट्रफ हिमालय की तराई के आसपास बनी हुई है। इसके अगले एक सप्ताह में सामान्य स्थिति की ओर लौटने की संभावना है। यदि ऐसा होता है तो मध्य प्रदेश के कई जिलों में फिर से अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। इससे खेती-किसानी के लिए भी राहत मिलने की उम्मीद है।
अलनीनो भी बना बारिश में कमी का कारण
इस वर्ष अलनीनो की परिस्थितियां विकसित होने की बात भी सामने आ रही है। सामान्य तौर पर अलनीनो का प्रभाव भारतीय मानसून को कमजोर करने वाला माना जाता है। ऐसे समय में कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश दर्ज होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून ब्रेक के साथ अलनीनो का असर भी प्रदेश में बारिश की कमी की एक प्रमुख वजह बन सकता है।
पिछले दस वर्षों का रिकॉर्ड क्या कहता है?
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक 166.4 मिमी बारिश दर्ज की गई है। वहीं पिछले वर्षों में वर्षा का आंकड़ा अलग-अलग रहा। वर्ष 2025 में 544.4 मिमी, 2024 में 542.4 मिमी, 2023 में 289 मिमी, 2022 में 854.5 मिमी, 2021 में 205.1 मिमी, 2020 में 154.7 मिमी, 2019 में 631.1 मिमी, 2018 में 354 मिमी, 2017 में 292.6 मिमी और 2016 में 670.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि हर वर्ष मानसून का स्वरूप अलग रहता है और बारिश की मात्रा में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।
किसानों और आमजन की नजर अब अगले सप्ताह पर
बारिश में आई कमी का असर खेतों से लेकर जल स्रोतों तक महसूस किया जा रहा है। ऐसे में किसानों के साथ-साथ आम लोगों की नजर अब अगले सप्ताह बनने वाली मौसमीय परिस्थितियों पर टिकी है। यदि मानसूनी ट्रफ सामान्य स्थिति में लौटती है तो प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। फिलहाल मौसम की चाल पर लगातार नजर रखी जा रही है और आने वाले दिनों में परिस्थितियां बदलने की संभावना जताई जा रही है।