Remedies for the month of Shravan: सावन का महीना हिन्दू धर्म में अत्यंत पावन माना जाता है। इस महीने का विशेष महत्व भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना से जुड़ा हुआ है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में माता पार्वती ने भगवान शिव को प्रसन्न करने और उन्हें पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। इसी दौरान, उन्होंने शिवजी के स्वागत और उनकी आराधना के लिए अपने हाथों में मेहंदी रचाई थी। यह मेहंदी न सिर्फ सौंदर्य का प्रतीक मानी जाती है, बल्कि इसे शुभता और सौभाग्य का भी प्रतीक माना जाता है।
जानें क्या है मान्यता?
माना जाता है कि माता पार्वती द्वारा लगाई गई मेहंदी से शिवजी अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने माता को पत्नी रूप में स्वीकार किया। तभी से यह परंपरा आरंभ हुई कि विवाहित महिलाएं और कुंवारी कन्याएं सावन में विशेष रूप से मेहंदी रचाती हैं। यह परंपरा विशेष रूप से हरियाली तीज और श्रावण सोमवार के अवसर पर देखी जाती है, जब महिलाएं व्रत रखती हैं और शिव-पार्वती की पूजा कर मेहंदी रचाकर अपने पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं।
नारी सौंदर्य का प्रतीक है मेहंदी
मेहंदी नारी सौंदर्य का प्रतीक तो है ही, साथ ही इसमें औषधीय गुण भी होते हैं। यह शरीर को ठंडक देती है और मन को प्रसन्न करती है। धार्मिक दृष्टि से भी, यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है और सकारात्मकता को आकर्षित करती है। यही कारण है कि सावन में मेहंदी रचाना केवल एक सजावटी परंपरा नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव भी है। इस प्रकार, सावन में मेहंदी रचाने की परंपरा न केवल माता पार्वती की भक्ति और प्रेम की याद दिलाती है, बल्कि आज भी महिलाओं के लिए सौभाग्य, समृद्धि और प्रेम का प्रतीक बनी हुई है।