
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद की एक होनहार छात्रा वानिया गुलरोज ने ऐसा अनोखा छाता (अंब्रेला) बनाया है जो केवल बारिश से ही नहीं बल्कि गर्मी, अंधेरे और मोबाइल चार्जिंग जैसी दिक्कतों से भी राहत दिला सकता है. यह छाता खासकर उन लोगों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है, जिनके पास रहने की स्थायी जगह नहीं है या जो झुग्गी-झोपड़ी में रहते हैं. वानिया की यह सोच और मेहनत समाज में एक बड़ा बदलाव ला सकती है, खासकर उन ज़रूरतमंद लोगों के लिए जिनके पास सुरक्षा, रोशनी या आराम की बुनियादी सुविधाएं नहीं होतीं. यह छाता वास्तव में एक छोटी सी चीज में बड़ी मदद देने वाला इनोवेशन है.
लाइट और पंखा भी, गर्मी-अंधेरे दोनों से राहत
वानिया ने इस छाते को बहुत सोच-समझकर डिज़ाइन किया है. उनका कहना है कि कई बार बारिश के साथ बिजली भी चली जाती है, जिससे रास्ता देखना मुश्किल हो जाता है. इसलिए उन्होंने छाते में LED लाइट लगाई है, जिससे अंधेरे में भी आसानी से चला जा सके. वहीं गर्मी को ध्यान में रखते हुए इसमें छोटा पंखा भी जोड़ा गया है ताकि चलने के दौरान ठंडी हवा मिलती रहे.
मोबाइल चार्जिंग और इमरजेंसी कॉल की सुविधा
इस स्मार्ट अंब्रेला में मोबाइल चार्जिंग पॉइंट भी है. वानिया कहती हैं कि अगर कभी मोबाइल की बैटरी खत्म हो जाए और इमरजेंसी में कॉल करना हो, तो यह फीचर बेहद काम आता है. खास बात यह है कि इस पूरे सिस्टम को सोलर पैनल से जोड़ा गया है, जिससे दिनभर सूरज की रोशनी से बैटरी चार्ज होती रहती है. इसका मतलब है कि लाइट, पंखा और चार्जिंग जैसी सुविधाएं लगातार मिलती रहेंगी, बिना बिजली की जरूरत के.
गरीबों के लिए यह छाता बन सकता है ‘चलता- फिरता घर’
वानिया ने इस खास छाते को महज 3 दिन में तैयार किया और इसमें लगभग 2500 से 3000 रुपए का खर्च आया. यह छाता खासकर उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी हो सकता है, जो फुटपाथ या खुले आसमान के नीचे सोते हैं. उनके लिए यह छाता एक छोटी सी चलती-फिरती छत बन सकता है, जो उन्हें बारिश, धूप और अंधेरे से बचाएगा.