नर्मदापुरम। नर्मदा घाटी क्षेत्र में सिंचाई और जल उपयोग की महत्वाकांक्षी योजना मोरंड-गंजाल परियोजना पार्ट-2 को निरस्त कर दिया गया है। करीब 70 करोड़ की लागत से तैयार यह प्रस्ताव 4400 हेक्टेयर क्षेत्रफल में सिंचाई की उम्मीद जगाता था। लेकिन नर्मदा नदी में पर्याप्त जल उपलब्ध न होने और मध्यप्रदेश द्वारा अपने हिस्से का पानी पहले ही उपयोग कर लेने के कारण यह योजना रद्द कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि अब प्रदेश में नर्मदा पर कोई नई परियोजना संभव नहीं है।
11 गांवों के किसानों को होता लाभ
मोरंड-गंजाल परियोजना पार्ट-2 का लाभ सिवनी मालवा क्षेत्र के लगभग 11 गांवों तक पहुंचना था। प्रस्तावित योजना से 111 हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित हो सकती थी। किसानों को उम्मीद थी कि सिंचाई साधनों के अभाव को यह परियोजना पूरा कर देगी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विभाग ने इसी कारण से सरकार को प्रस्ताव भेजा था।
विरोध के बीच भी जारी है पार्ट-1
मोरंड-गंजाल परियोजना पार्ट-1 पर काम विरोध के बावजूद जारी है। ग्रामीणों ने बांध निर्माण पर आपत्ति जताई थी, लेकिन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है। फिलहाल परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय और विभागीय अनुमतियों का कार्य चल रहा है।
नर्मदा पर नई परियोजना असंभव
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि मध्यप्रदेश पहले ही नर्मदा नदी से अपने हिस्से का 18.25 एमएएफ पानी उपयोग कर रहा है। ऐसे में प्रदेश के लिए नर्मदा पर कोई नई परियोजना बनाना संभव नहीं है। इस वजह से मोरंड-गंजाल परियोजना पार्ट-2 का प्रस्ताव भी निरस्त कर दिया गया है।