UP News: उत्तर प्रदेश के राजकीय चिकित्सालयों में डीएनबी (डिप्लोमा/डिग्री) पाठ्यक्रम की करीब 100 से अधिक सीटें बढ़ाई जाएंगी। इससे विभिन्न सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर हो सकेगी। इसके लिए सभी अस्पतालों के चिकित्सा अधीक्षकों से डॉक्टरों की सूची मांगी गई है।
पोस्ट-डिप्लोमा की 23 सीटें हैं
जानकारी के मुताबिक नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंस (एनबीईएमएस) द्वारा चलाए जाने वाले डीएनबी डिग्री और डिप्लोमा को एमडी-एमएस के बराबर माना जाता है। इस कोर्स में सरकारी अस्पतालों में कार्यरत एमबीबीएस डॉक्टरों को वरीयता दी जाती है। वर्तमान में प्रदेश के 39 राजकीय अस्पतालों में 11 विषयों में तीन वर्षीय डीएनबी कोर्स की 98 और छह विषयों में दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स की 85 सीटें हैं। इसके अलावा पोस्ट-डिप्लोमा की 23 सीटें हैं।
100 सीटें और बढ़ाने की तैयारी
अब अलग-अलग विषयों में लगभग 100 सीटें और बढ़ाने की तैयारी है। स्वास्थ्य महानिदेशक (प्रशिक्षण) डॉ. एचडी अग्रवाल ने बताया कि सभी अस्पतालों में कार्यरत पीजी डॉक्टरों का विवरण जुटाया जा रहा है। डॉक्टरों की संख्या के अनुसार डीएनबी सीटें बढ़ाने के लिए आवेदन कराया जाएगा।
योग्यता में बदलाव
स्वास्थ्य महानिदेशक (प्रशिक्षण) डॉ. एचडी अग्रवाल ने बताया कि डीएनबी कोर्स संचालन के लिए फैकल्टी की योग्यता में बदलाव किया गया है। अब सीनियर फैकल्टी की योग्यता तीन वर्षीय कोर्स के लिए एमडी-एमएस के अलावा 8 वर्ष का अनुभव और दो वर्षीय के लिए 5 वर्ष का अनुभव कर दिया गया है। इसी तरह जूनियर फैकल्टी के लिए तीन वर्षीय कोर्स में अनुभव पांच वर्ष और डिप्लोमा के लिए तीन वर्ष कर दिया गया है। पहले लगभग 13 से 15 वर्षों का का अनुभव रखने वाले ही फैकल्टी माने जाते थे।
इसी तरह 10 साल के अनुभवी डॉक्टर को सहायक फैकल्टी बनाया जाता था। अनुभव घटाने से फैकल्टी की संख्या अधिक हो गई है। अब उसी हिसाब से सीटें बढ़ाई जा सकेंगी।
मरीजों को होगा फायदा
प्रदेश के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। डीएनबी कोर्स करने वाले सरकारी अस्पताल के एमबीबीएस डॉक्टर ग्रामीण और जिला अस्पतालों में तैनात होंगे। इनकी नियुक्ति 10 साल की सेवा बॉन्ड के तहत होगी। इससे सीएचसी और जिला अस्पतालों में सर्जरी, ईएनटी, नेत्र, बाल रोग सहित अन्य विशेषज्ञ इलाज उपलब्ध होंगे और मेडिकल कॉलेजों में मरीजों की भीड़ कम होगी।