
मुजफ्फरनगर। हत्या के मामले में चश्मदीद गवाह की कोर्ट में गवाही न होने देने के लिए आरोपियों ने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी। इस मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट (नंबर 01) के पीठासीन अपर सत्र न्यायाधीश निशांत सिंगला ने 3 महिलाओं समेत 6 आरोपियों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने प्रत्येक अभियुक्त पर कुल 65 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। सजा पाने वालों में मां, बेटे व बेटी शामिल हैं।
अभियोजन की ओर से कोर्ट में पैरवी करने वाले सहायक शासकीय अधिवक्ता नीरज कांत मलिक और जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव शर्मा ने बताया कि जनपद शामली की कोतवाली क्षेत्र के गांव लिलौन में वर्ष 2013 में एक बच्चे की हत्या कर दी गयी थी। इस हत्या के मामले में परिवार का अंजुल निवासी लिलौन चश्मदीद गवाह था। हत्यारोपी उस पर हत्या के मामले में फैसला करने और कोर्ट में आरोपियों के खिलाफ गवाही नहीं देने का दबाव बना रहे थे। फैसला न मानने पर आरोपियों ने 26 फरवरी 2017 को गांव में अंजुल की भी गोली मारकर हत्या कर दी थी।
इस मामले में डिंपल पत्नी संदीप, शकुन्तला पत्नी श्याम सिंह, अंजु उर्फ बोबी पुत्री श्याम सिंह, अमित पुत्र श्याम सिंह, संदीप उर्फ छोटा पुत्र सीताराम व वीरेन्द्र पुत्र बाबूराम निवासीगण लिलोन को नामजद किया गया था। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। विवेचना करने के बाद पुलिस ने तीनों महिलाओं समेत सभी छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। मामला सेशंस सुपुर्द होने के बाद इस मामले की सुनवाई एफटीसी (कोर्ट नम्बर 1) के अपर सत्र न्यायाधीश निशांत सिंगला की कोर्ट में हुई। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर के पश्चात सभी 06 आरोपियों को हत्या के मामले में दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने प्रत्येक आरोपी पर विभिन्न धाराओं में 65-65 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।
पुलिस पर जानलेवा हमल के दो आरोपियों को दोषी मानते हुए कोर्ट ने सजा सुनाई है। अभियोजन के अनुसार आरोपी भोगा उर्फ आजाद उर्फ आबेखान निवासी भोपुर थाना भोजपुर जनपद मुरादाबाद व फिरोज खान उर्फ सूरज निवासी लाहरा कामनगर थाना हयातनगर जनपद सम्भल हाल पता झुग्गी झोपड़ी मोहल्ला सराय थाना गंगोह जनपद सहारनपुर को पुलिस के ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत एफटीसी-3 कोर्ट ने सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपी भोगा उर्फ आजाद को तीन साल की सजा व 7 हजार रुपए का अर्थदंड, जबकि आरेापी फिरोज को 3 साल की सजा व 11 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है।