नई दिल्ली । केंद्र सरकार में प्रशासनिक ढांचे की रीढ़ कहे जाने वाले वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी में अब उत्तर भारत के अफसरों का दबदबा साफ झलक रहा है। खासकर मध्यप्रदेश से निकलकर आए IAS अफसरों ने नई पहचान बनाई है। फिलहाल केंद्र के 9 मंत्रालयों की कमान एमपी के अफसरों के पास है। यह स्थिति इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि पहले प्रमुख मंत्रालयों की जिम्मेदारी दक्षिण भारत के अधिकारियों के पास हुआ करती थी, लेकिन अब समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अफसरों की संख्या और जिम्मेदारी बढ़ना उनके बेहतर परफॉर्मेंस का ही नतीजा है।
एमपी के IAS सबसे आगे
मध्यप्रदेश के IAS अफसरों ने बाकी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। अभी केंद्र के 9 मंत्रालयों का नेतृत्व एमपी से आने वाले अफसर कर रहे हैं। वहीं बिहार से जुड़े अधिकारी 7 मंत्रालयों और उत्तराखंड के 6 अधिकारी मंत्रालयों की कमान संभाल रहे हैं। यह बढ़त बताती है कि केंद्र सरकार प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लिए बेहतर परफॉर्मेंस वाले अधिकारियों को प्राथमिकता दे रही है।
कौन संभाल रहे जिम्मेदारी
मध्यप्रदेश से आने वाले अफसर ऊर्जा, खनन, संस्कृति, खेल, युवा कल्याण, टैक्सटाइल, पशुपालन-डेयरी, कॉरपोरेट मामलों से लेकर समन्वय जैसे मंत्रालयों का जिम्मा संभाल रहे हैं। इस तरह से अलग-अलग क्षेत्रों की कमान एमपी के अधिकारियों के हाथों में होना इस बात का सबूत है कि नीति निर्माण और फैसले लेने की प्रक्रिया में उनकी अहम भूमिका है।
परफॉर्मेंस का मिला इनाम
केंद्र स्तर पर साफ दिख रहा है कि जिन अधिकारियों ने अपने काम से बेहतर नतीजे दिए, उन्हें ही बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई। प्रशासनिक सुधार से जुड़े जानकारों का कहना है कि एमपी के अफसर लगातार अपनी क्षमता साबित कर रहे हैं, इसलिए उनकी संख्या और जिम्मेदारी दोनों ही बढ़ रही हैं।