MP ELECTION 2023 CONTROVERSY: मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों में हुए पिछले चुनावों को रद्द कर दोबारा चुनाव कराने की आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल की मांग ने राजनीतिक बहस तेज कर दी है। केजरीवाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग के साथ हाल के चुनावों को निरस्त कर नए सिरे से मतदान कराने की बात कही है। मध्यप्रदेश का 2023 विधानसभा चुनाव भी इस मांग में शामिल है। हालांकि, चुनाव रद्द करने के सवाल पर कानूनी प्रक्रिया और ठोस सबूत अहम भूमिका निभाते हैं।
केजरीवाल ने क्यों उठाया चुनाव रद्द करने का मुद्दा?
अरविंद केजरीवाल ने 23 सितंबर को चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और वोटर लिस्ट में चल रही Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की और दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत हाल के चुनावों को रद्द कर दोबारा कराने की मांग रखी।
विवाद की जड़ में SIR प्रक्रिया
केजरीवाल का आरोप है कि SIR के दौरान मतदाता सूची में बड़े स्तर पर बदलाव किए गए और चुनाव आयोग के कामकाज में मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को लेकर भी सवाल हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने इन आरोपों और आयोग के भीतर मतभेद की व्याख्या को खारिज किया है। आयोग के अनुसार SIR समेत फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए।
क्या सिर्फ मांग से रद्द हो जाएगा चुनाव?
सिर्फ किसी राजनीतिक दल या नेता की मांग से पहले हो चुके चुनाव अपने आप रद्द नहीं होते। किसी चुनाव की वैधता को चुनौती देने के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनानी होती है और संबंधित आरोपों के समर्थन में ठोस आधार पेश करना पड़ता है। इसलिए 2023 में हुए मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव को केवल राजनीतिक मांग के आधार पर निरस्त मान लेना सही नहीं होगा।
विवेक तन्खा ने बताई कानूनी स्थिति
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा के हवाले से कहा गया है कि चुनाव रद्द करना असाधारण परिस्थिति का विषय हो सकता है और इसके लिए ठोस साक्ष्य जरूरी होंगे। उनका कहना है कि यदि किसी पक्ष के पास पर्याप्त सबूत हैं तो वह अदालत का रुख कर सकता है। ऐसे में केजरीवाल की मौजूदा मांग को लेकर अंतिम स्थिति किसी राजनीतिक बयान से नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों से तय होगी।
MP के 2023 चुनाव पर अभी क्या स्थिति?
मौजूदा विवाद में अरविंद केजरीवाल ने मध्यप्रदेश के पिछले विधानसभा चुनाव को भी रद्द कर दोबारा कराने की मांग की है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि चुनाव रद्द हो गए हैं या उन्हें रद्द करने का कोई आदेश जारी हो चुका है। फिलहाल यह एक राजनीतिक मांग है, जबकि चुनाव की वैधता को चुनौती देने और उस पर फैसला होने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया जरूरी होगी।