मध्यप्रदेश विधानसभा अब डिजिटल इंडिया की राह पर और तेज कदम बढ़ा रही है। मानसून सत्र 2025 से विधानसभा की कार्यप्रणाली पूरी तरह हाईटेक होने जा रही है। इस बार विधायक फाइलों और कागजों के ढेर की जगह टैबलेट के ज़रिए सदन में मौजूद रहेंगे। जीरो पेपर पॉलिसी लागू करते हुए कार्यवाही पूरी तरह डिजिटल फॉर्मेट में संचालित की जाएगी। मानसून सत्र 2025 में जब विधायक सदन में प्रवेश करेंगे, तो हर टेबल पर टैबलेट रखा होगा। इसमें प्रश्नोत्तर, राज्य का बजट, विभागीय प्रतिवेदन, विधेयक सहित तमाम जरूरी दस्तावेज डिजिटल रूप में उपलब्ध होंगे। यह पहल जीरो पेपर पॉलिसी को बढ़ावा देने के साथ-साथ कार्य को स्मार्ट और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
मानसून सत्र से पहले हो जाएगा शुरू
इस पूरे सिस्टम को तैयार करने की जिम्मेदारी नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) को सौंपी गई है। विधानसभा प्रमुख सचिव अवधेश प्रताप सिंह ने जानकारी दी कि मानसून सत्र से पहले व्यवस्था को अंतिम रूप देने का लक्ष्य है। इसके लिए विधायकों को डिजिटल कामकाज का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।शुरुआत में मौजूदा व्यवस्था के तहत हार्डकॉपी भी जारी रहेगी, लेकिन साथ में सॉफ्टकॉपी भी प्रदान की जाएगी, ताकि धीरे-धीरे पूरी व्यवस्था पेपरलेस की ओर बढ़े।
ऑनलाइन कामकाज जुड़ा
विधानसभा सचिवालय पहले से मंत्रालय के साथ ऑनलाइन काम-काज में जुड़ा है। सभी विधायकों के ई-मेल आईडी बनाए जा चुके हैं और उनके डिजिटल सिग्नेचर भी तैयार कर लिए गए हैं। अब इन्हीं सिग्नेचर्स के ज़रिए विधान से जुड़ी प्रक्रिया को वैधता दी जाएगी।
इस पहल के माध्यम से MP विधानसभा देश की पहली पूर्णतः डिजिटल विधानसभाओं में शामिल होने की ओर अग्रसर है।