मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। पांच दिवसीय सत्र को लेकर सरकार और विभागों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। सदन में विधायकों के सवालों का सटीक और समय पर जवाब देने के लिए विभिन्न विभागों ने नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की है। ये अधिकारी मंत्रियों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएंगे और विधानसभा की कार्यवाही के दौरान समन्वय की जिम्मेदारी संभालेंगे।
सत्र से पहले विभागों की तैयारी पूरी
विधानसभा के मानसून सत्र को देखते हुए सरकारी विभागों ने अपनी तैयारियां अंतिम चरण में पहुंचा दी हैं। विभिन्न विभागों में अधिकारियों की जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं, ताकि सदन में पूछे जाने वाले प्रश्नों का तथ्यात्मक और समयबद्ध जवाब उपलब्ध कराया जा सके। विभागीय स्तर पर रिकॉर्ड, दस्तावेज और आंकड़ों को भी अपडेट किया जा रहा है।
नोडल अधिकारी करेंगे मंत्रियों की सहायता
सदन की कार्यवाही के दौरान मंत्रियों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए विभागवार नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। जल संसाधन विभाग ने भी इंजीनियर स्तर के अधिकारियों को यह जिम्मेदारी सौंपी है। ये अधिकारी विधानसभा में दिए गए आश्वासनों का रिकॉर्ड रखेंगे, संबंधित जानकारियां प्रमुख अभियंताओं तक पहुंचाएंगे और अगले दिन पूछे जाने वाले संभावित सवालों के लिए मंत्रियों को आवश्यक इनपुट उपलब्ध कराएंगे।
20 जुलाई से शुरू होगा पांच दिवसीय सत्र
मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से 24 जुलाई तक आयोजित होगा। पहले चार दिनों में प्रश्नकाल, शासकीय कार्य और विभिन्न विधायी कार्यों पर चर्चा होगी। इसी दौरान सरकार पहला अनुपूरक बजट भी सदन में पेश करेगी। अंतिम दिन प्रश्नकाल के साथ अशासकीय संकल्पों पर भी चर्चा प्रस्तावित है। सरकार इस सत्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर प्रस्ताव लाने की तैयारी में है।
विपक्ष भी सरकार को घेरेगा
मानसून सत्र को लेकर विपक्ष ने भी अपनी रणनीति तैयार कर ली है। कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दल भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं, पेपर लीक, किसानों की समस्याओं, स्वास्थ्य सेवाओं, भूमि से जुड़े मामलों और अन्य जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में हैं। माना जा रहा है कि सदन के भीतर इन विषयों पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
हंगामेदार रहने के आसार
सरकार जहां अपनी उपलब्धियों और प्रस्तावों को सदन में रखने की तैयारी कर रही है, वहीं विपक्ष जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है। ऐसे में पांच दिवसीय मानसून सत्र के दौरान कई अहम विषयों पर चर्चा, सवाल-जवाब और राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है।