मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। पांच दिन चलने वाले इस सत्र में प्रदेश सरकार कई अहम विधेयक पेश करने की तैयारी में है। इनमें समान नागरिक संहिता (UCC), अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं, कॉलोनी विकास, कोचिंग संस्थान विनियमन और अनुपूरक बजट समेत करीब 10 महत्वपूर्ण विधेयक शामिल हैं। सरकार अवैध कॉलोनियों पर सख्त कार्रवाई और फायर सेफ्टी नियमों को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़े कदम उठाने जा रही है।
UCC समेत कई अहम विधेयकों पर रहेगा फोकस
मानसून सत्र में सरकार का सबसे बड़ा फोकस समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पर रहेगा। इसके लिए गठित समिति ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने में जुटी है। इसके अलावा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक, पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज, कोचिंग संस्थान विनियमन, वाणिज्यिक कर, श्रम, सिंहस्थ मेला और विनियोग संबंधी विधेयक भी सदन में लाए जाने की तैयारी है। इसी सत्र में प्रथम अनुपूरक बजट पेश किए जाने की भी संभावना है।
अवैध कॉलोनियों पर सख्त कानून की तैयारी
नगरीय विकास विभाग कॉलोनी विकास विधेयक के जरिए अवैध कॉलोनियों पर सख्त नियंत्रण की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार अवैध कॉलोनी विकसित करने पर अधिकतम 10 वर्ष की सजा और 5 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। कॉलोनाइजर को तय समय सीमा में सड़क, बिजली, पानी और सीवेज जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी। साथ ही सभी कॉलोनियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, ताकि नागरिक संपत्ति खरीदने से पहले उसकी वैधता ऑनलाइन जांच सकें।
फायर एक्ट से बढ़ेंगी दमकल विभाग की शक्तियां
मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक के तहत फायर सेफ्टी नियमों को और कड़ा किया जाएगा। फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट नहीं लेने वालों पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। आग बुझाने के दौरान दमकल विभाग को जरूरत पड़ने पर निजी परिसर में प्रवेश करने, बाधा बनने वाले निर्माण को हटाने और निजी जलस्रोतों का उपयोग करने का अधिकार मिलेगा। गलत सूचना देने वालों पर भी आर्थिक दंड लगाया जाएगा।
पांच दिन का होगा मानसून सत्र
विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 24 जुलाई तक चलेगा। हालांकि पहले इसके सात दिन तक चलने की चर्चा थी, लेकिन सरकार ने इसे पांच दिवसीय सत्र ही रखा है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण विधायी और वित्तीय प्रस्तावों पर चर्चा होगी। राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से यह सत्र प्रदेश सरकार के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।