28 जुलाई से शुरू हो रहे मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में विधायकों को सवाल पूछने के लिए पूरी आज़ादी दी गई है। सचिवालय ने विधायकों को नियमों की जानकारी देकर सूचनाएं भेजना शुरू कर दिया है। विपक्ष ने सरकार को घेरने की रणनीति बना ली है।
सवाल पूछने की खुली छूट, ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यम
मानसून सत्र के लिए विधायकों को 11 जुलाई तक लिखित सवाल भेजने की अनुमति दी गई है। इसके लिए उन्हें ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा सत्र शुरू होने से पहले 22 जुलाई से ध्यानाकर्षण, शून्यकाल और स्थगन प्रस्तावों के लिए सूचनाएं ली जाएंगी।
एक बैठक में एक स्थगन प्रस्ताव की ही अनुमति
सचिवालय द्वारा विधायकों को भेजे गए पत्र में साफ किया गया है कि एक बैठक में केवल एक स्थगन प्रस्ताव की सूचना ही दी जा सकती है। यदि कोई विधायक एक से अधिक प्रस्ताव भेजता है, तो उसे विषय और तिथि स्पष्ट करनी होगी। ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के लिए भी तय नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
विपक्ष ने बनाई आक्रामक रणनीति
विपक्षी दलों ने मानसून सत्र को लेकर कमर कस ली है। विधायकों से कहा गया है कि वे सरकार की जवाबदेही तय करने वाले सवाल तैयार करें। विपक्ष का फोकस अपराध, भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सरकार को कटघरे में खड़ा करने पर है।