मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) विधेयक सदन में पेश कर दिया। इससे एक दिन पहले डॉ. मोहन यादव कैबिनेट ने इसे मंजूरी दी थी। मंत्री गौतम टेटवाल ने सदन के पटल पर विधेयक रखा। अब इस पर 21 जुलाई को विस्तृत चर्चा होगी। बिल पेश होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाजी भी देखने को मिली।
सदन में पेश हुआ यूसीसी विधेयक
मानसून सत्र के पहले दिन सरकार की ओर से मंत्री गौतम टेटवाल ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) विधेयक विधानसभा के पटल पर रखा। रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस विधेयक को मंजूरी दी गई थी। सरकार की ओर से अब इस पर दूसरे दिन यानी 21 जुलाई को चर्चा कराए जाने की तैयारी है।
कार्यवाही की शुरुआत श्रद्धांजलि से हुई
सत्र की शुरुआत दिवंगत नेताओं और विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दिवंगत जनप्रतिनिधियों एवं अन्य प्रमुख व्यक्तियों का उल्लेख किया। इस दौरान विपक्ष ने बरगी हादसे, नीट पेपर प्रकरण में जान गंवाने वाले छात्रों और पटाखा फैक्ट्री हादसे में मृत लोगों को भी श्रद्धांजलि देने की मांग उठाई। इसके बाद दिवंगतों के सम्मान में सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित की गई।
यूसीसी पर विपक्ष का विरोध
यूसीसी विधेयक को लेकर पहले दिन से ही राजनीतिक माहौल गर्म दिखाई दिया। कांग्रेस विधायक आतिफ अकील काले कपड़े पहनकर विधानसभा पहुंचे और यूसीसी के विरोध में पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया। उन्होंने आदिवासी समुदाय की तरह मुस्लिम समाज को भी यूसीसी के दायरे से बाहर रखने की मांग उठाई। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भी विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि इस विषय पर सदन में विस्तार से अपनी बात रखेंगे।
सत्ता और विपक्ष के अलग-अलग तर्क
कांग्रेस के पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने कहा कि देश का युवा यूनिफॉर्म सिविल कोड नहीं बल्कि यूनिफॉर्म एजुकेशन कोड चाहता है और सरकार को शिक्षा, रोजगार तथा युवाओं के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। वहीं कांग्रेस विधायक अनुभा मुंजारे ने महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के मुद्दे उठाए। दूसरी ओर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि सरकार सभी नागरिकों को समान अधिकार देने के उद्देश्य से यूसीसी ला रही है। भाजपा विधायक गोपाल भार्गव ने भी कहा कि विवाह और पारिवारिक व्यवस्था को लेकर विधेयक में बेहतर प्रावधान किए गए हैं। अब इस विधेयक पर विधानसभा में 21 जुलाई को विस्तृत चर्चा होगी।