मध्य प्रदेश विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 17 दिसंबर को आयोजित किया जाएगा। यह सत्र ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी दिन विधानसभा की पहली बैठक के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सहमति के बाद सत्र बुलाने का निर्णय लिया गया। सत्र में मध्य प्रदेश को विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध राज्य बनाने की रणनीतियों पर चर्चा होगी।
75 वर्षों की लोकतांत्रिक यात्रा का स्मरण
मध्य प्रदेश विधानसभा के गठन के बाद पहली बैठक 17 दिसंबर 1956 को हुई थी। अब 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर यह विशेष सत्र आयोजित किया जा रहा है। यह सत्र केवल औपचारिक नहीं, बल्कि राज्य की लोकतांत्रिक परंपराओं और विधायी इतिहास को स्मरण करने का अवसर भी बनेगा। सदन में विधानसभा की भूमिका, जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारियों और भविष्य की दिशा पर भी विचार किया जाएगा।
विकसित मध्य प्रदेश के विजन पर फोकस
इस विशेष सत्र का मुख्य उद्देश्य प्रदेश को विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने के विजन पर चर्चा करना है। सरकार द्वारा आर्थिक विकास, औद्योगिक निवेश, कृषि सुधार और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं पर विमर्श किया जाएगा। विधायकों को यह अवसर मिलेगा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों की जरूरतों और विकास संबंधी सुझाव सदन के पटल पर रखें।
रोजगार, युवा और बुनियादी ढांचे पर चर्चा
सत्र के दौरान रोजगार सृजन, युवाओं के कौशल विकास, शिक्षा और आधुनिक बुनियादी ढांचे जैसे विषयों पर भी चर्चा होने की संभावना है। सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और डिजिटल कनेक्टिविटी को लेकर सरकार की भविष्य की योजनाओं पर सदन में विचार-विमर्श किया जाएगा, ताकि विकास का लाभ प्रदेश के हर वर्ग तक पहुंच सके।
किसान, महिला और सामाजिक सशक्तिकरण
कृषि, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी सत्र के अहम एजेंडे में शामिल रहेंगे। किसानों की आय बढ़ाने, महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने और कमजोर वर्गों के लिए योजनाओं को और प्रभावी बनाने पर चर्चा की जाएगी। यह सत्र नीतिगत सुझावों के आदान-प्रदान का मंच बनेगा।
अल्पकालिक सत्र, दीर्घकालिक असर
हालांकि यह सत्र केवल एक दिन का है, लेकिन इसका प्रभाव दीर्घकालिक हो सकता है। सरकार पिछले वर्षों की उपलब्धियों को साझा करने के साथ-साथ भविष्य की प्राथमिकताएं भी सामने रख सकती है। विधानसभा सचिवालय ने सत्र को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं, जिससे यह ऐतिहासिक अवसर सार्थक और परिणामकारी बन सके।