मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र का आखिरी दिन कई अहम मुद्दों की गूंज से भरा रहा। शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान भ्रष्टाचार, अधूरे विद्युतीकरण, ऑडोटोरियम निर्माण और बिजली खरीद जैसे मुद्दों पर जोरदार बहस हुई। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को तेज आवाज में उठाया। मंत्री भी जवाबों के साथ तैयार दिखे, लेकिन सवालों की तीव्रता ने माहौल को पूरे समय गर्म रखा।
सदन में सबसे पहले उठा भ्रष्टाचार का सवाल
पांचवें और अंतिम दिन की शुरुआत ही भ्रष्टाचार के मुद्दे से हुई। एक विधायक ने आरोप लगाया कि नगर परिषद में सफाईकर्मियों के बिल बढ़ाकर दिखाए जा रहे हैं और कर्मचारियों को अधिक भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने CMO पर कार्रवाई की मांग उठाई।
जवाब में संबंधित मंत्री ने माना कि शिकायत गंभीर है और जल्द ही क्षेत्र के लिए एक मास्टर प्लान लागू किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए CMO को हटाने की कार्रवाई की जा चुकी है।
विद्युतीकरण के अधूरे काम पर विपक्ष का हमला
विपक्ष के एक विधायक ने खरगापुर क्षेत्र में कई स्थानों पर अधूरे विद्युतीकरण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि निर्देशों के बावजूद विभागीय अधिकारियों ने काम शुरू नहीं किया।
मंत्री ने जवाब में बताया कि विद्युतीकरण का सर्वे जारी है और मंजरे तथा टोले के काम प्रक्रिया में हैं। उनकी मानें तो पूरा कार्य क्षेत्रीय सर्वे के आधार पर ही आगे बढ़ाया जाएगा।
ऑडोटोरियम भवन निर्माण पर भी छिड़ी बहस
सदन में ऑडोटोरियम निर्माण का मुद्दा भी गर्माया। एक विधायक ने सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी विधानसभा में निर्माण कार्य लटका हुआ है। मंत्री ने जवाब दिया कि नया ऑडोटोरियम बनाना काफी महंगा होगा, इसलिए मौजूदा गीता भवन को ऑडोटोरियम के साथ आधुनिक तरीके से डिजाइन किया जाएगा। परासिया क्षेत्र के चांदामेटा में नए निर्माण का प्रस्ताव भी विचाराधीन है।
बिजली खरीद और बकाया ने बढ़ाई गर्मी
एक अन्य विधायक ने सवाल उठाया कि राज्य में सरप्लस बिजली होने के बावजूद पॉवर एक्सचेंज से बिजली क्यों खरीदी जा रही है। जवाब में मंत्री ने बताया कि बड़े उपभोक्ताओं और औद्योगिक इकाइयों पर 1200 करोड़ से अधिक का बकाया है, जिसके चलते परिस्थितियों में बिजली खरीद की जरूरत पड़ रही है। स्मार्ट मीटर की दिक्कतों को दूर करने के प्रयास भी जारी हैं।