Mp baiga tribe ayurveda: भारत में हर साल 23 सितंबर को आयुर्वेद दिवस मनाया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश के सबसे पुराने वैद्य किसे माना जाता है? मध्य प्रदेश की बैगा जनजाति को भारत की सबसे प्राचीन वैद्य परंपरा का धनी माना जाता है। घने जंगलों के बीच रहने वाली यह जनजाति जंगली जड़ी-बूटियों की अद्भुत जानकारी रखती है। बैगा लोग दावा करते हैं कि उनके पास हर बीमारी का इलाज जड़ी-बूटियों से मौजूद है। यही वजह है कि इन्हें जंगल का असली वैद्य कहा जाता है।
बैगा चकः जंगलों में बसा अद्भुत संसार
मध्य प्रदेश के मंडला, बालाघाट, उमरिया, डिंडोरी और शहडोल जिलों के बीच का इलाका बैगा चक कहलाता है। यहां बैगा जनजाति के लोग सदियों से रहते आ रहे हैं। इनकी पहचान शरीर पर बने गोदना (टैटू) से होती है। 2011 की जनगणना के अनुसार बैगा जनजाति की आबादी देश में लगभग 55 हजार है। इनके गांव जंगलों के बीच बसे हैं, जहां तक पहुंचने के लिए कई जगह आज भी कोई पक्का रास्ता नहीं है।
हर बीमारी का जड़ी-बूटी से इलाज
बैगा जनजाति जंगलों में मिलने वाले कंदमूल, फल, बीज और जंगली पौधों को पहचानने में माहिर हैं। इन्हीं वन संपदाओं का उपयोग वे बीमारियों के इलाज में करते हैं। कुसुम, कटई, करहरी, मंडरी, निर्गुंड़ी, करौंदा, पीपल, आंवला, हरड़, बहेड़ा, पीली हल्दी और ब्रह्मी जैसी सैकड़ों जड़ी-बूटियों के प्रयोग से वे दवाएं बनाते हैं। बैगा लोगों का मानना है कि सही जड़ी-बूटी से हर रोग का उपचार संभव है।
सुरक्षित परंपरा और अनूठी खेती
बैगा जनजाति अनुसूचित जनजाति में शामिल है और इनके क्षेत्रों को पूरी तरह से सुरक्षित रखा गया है। यहां न तो कोई बाहरी व्यक्ति जमीन खरीद सकता है और न ही इन्हें विस्थापित किया जा सकता है। ये लोग बेवर खेती करते हैं, यानी एक बार जिस जगह खेती कर लें, वहां दोबारा खेती नहीं करते।