ग्वालियर की एक अदालत में सुनवाई के दौरान हुई एक टाइपिंग गलती ने जमानत आदेश का पूरा नतीजा उलट-पुलट कर दिया। जिस आरोपी को जमानत मिलनी थी, उसकी अर्जी खारिज कर दी गई, और जिसे जमानत नहीं मिलनी थी, उसे बेल मिल गई। आदेश वेबसाइट पर अपलोड होते ही आरोपी के वकील ने जमानत भर दी और रिहाई का आदेश जेल तक पहुंच गया। हालांकि, अदालत ने तत्काल आदेश रद्द कर दिया और मामले की सुनवाई अब 11 अगस्त को तय की गई है।
कैसे हुई गलती
7 अगस्त 2025 को हल्के आदिवासी और धर्मेंद्र आदिवासी की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई हुई। 8 अगस्त को सुबह करीब 10:45 बजे वेबसाइट पर आदेश अपलोड हुआ, जिसमें हल्के को जमानत दी गई और धर्मेंद्र की याचिका खारिज हो गई। लेकिन शाम 6:30 बजे एक और आदेश जारी हुआ, जिसमें बताया गया कि टाइपिंग मिस्टेक के कारण नाम उलट गए थे। असल में, जिसे जमानत देनी थी, उसका नाम किसी और की जगह दर्ज हो गया था।
आदेश के बाद की घटनाएं
पहला आदेश जारी होते ही हल्के आदिवासी के वकील ने जमानत की प्रक्रिया पूरी कर दी और रिहाई का आदेश जेल तक पहुंच गया। मगर, हाईकोर्ट की तत्परता से दूसरा आदेश जारी कर पहला आदेश रद्द कर दिया गया, जिससे रिहाई रुक गई। अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई 11 अगस्त को तय की है।
केस की पृष्ठभूमि
यह मामला विदिशा जिले के त्यौंदा थाना क्षेत्र में 5 जुलाई 2024 को हुई हत्या से जुड़ा है। आरोप है कि प्रकाश पाल की दुकान पर हल्के और धर्मेंद्र ने डंडे और पत्थरों से हमला कर हत्या कर दी थी। पुलिस ने हल्के को 8 जुलाई और धर्मेंद्र को 10 जुलाई को गिरफ्तार किया था।