भोपाल। मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। चुनाव की औपचारिक अधिसूचना जारी हो चुकी है, लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो एक बार फिर प्रदेश अध्यक्ष का चयन सर्वसम्मति से किया जाएगा। नामांकन प्रक्रिया मंगलवार को होगी और बुधवार, 2 जुलाई को नए प्रदेश अध्यक्ष की आधिकारिक घोषणा की जाएगी। सूत्रों के अनुसार बैतूल से विधायक और पूर्व सांसद हेमंत खंडेलवाल इस दौड़ में सबसे आगे हैं। संघ से गहरे जुड़े हेमंत की संगठन पर अच्छी पकड़ मानी जाती है, जो उन्हें अन्य दावेदारों पर बढ़त दिला रही है।
नामांकन से लेकर घोषणा तक का पूरा शेड्यूल तय
प्रदेश अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए मंगलवार शाम 4:30 से 6:30 बजे तक नामांकन पत्र जमा किए जाएंगे। इसके बाद एक घंटे के भीतर नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। शाम 7:30 से 8:00 बजे तक नाम वापसी का समय रखा गया है। रात 8 बजे तक फाइनल सूची घोषित की जाएगी।
यदि सर्वसम्मति नहीं बनती है तो बुधवार को सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक मतदान कराया जाएगा और परिणाम तुरंत घोषित किए जाएंगे।
प्रदेश अध्यक्ष के साथ चुने जाएंगे राष्ट्रीय परिषद सदस्य
इस चुनाव में प्रदेश अध्यक्ष के साथ-साथ भाजपा राष्ट्रीय परिषद के 44 सदस्यों का भी चयन होगा। इसमें प्रदेश परिषद के 379 सदस्य मतदान करेंगे। इनमें मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद और विधायक शामिल हैं।
कौन हैं हेमंत खंडेलवाल?
हेमंत खंडेलवाल मध्य प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। वे बैतूल लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं और वर्तमान में विधायक हैं।
वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पृष्ठभूमि से आते हैं। उनके पिता विजय कुमार खंडेलवाल तीन बार सांसद रह चुके हैं। पिता के निधन के बाद उन्होंने उपचुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया था। वर्तमान में वे दूसरी बार विधायक हैं।प्रदेश में पदोन्नति में आरक्षण का मुद्दा राजनीतिक रूप से गरमाया हुआ है। ऐसे में सामान्य वर्ग से अध्यक्ष बनाए जाने की संभावना ज्यादा मानी जा रही है।
आदिवासी और महिला चेहरे भी दौड़ में
हालांकि पार्टी सूत्रों का यह भी कहना है कि हेमंत खंडेलवाल के अलावा कुछ और नामों पर भी चर्चा चल रही है।इनमंय आदिवासी सांसद दुर्गादास उईके, गजेंद्र पटेल, सुमेर सिंह सोलंकी, हिमाद्री सिंह, और महिला नेता रंजना बघेल के नाम शामिल हैं। इसके अलावा ब्राह्मण और क्षत्रिय वर्ग से भी कुछ नेता दौड़ में हैं।
अब तक दो बार ही हुआ है मतदान
मध्य प्रदेश भाजपा के इतिहास में ज्यादातर बार प्रदेश अध्यक्ष का चयन सर्वसम्मति से हुआ है। केवल दो बार ऐसा हुआ जब मतदान कराना पड़ा:
1. 1990 के दशक में लखीराम अग्रवाल और कैलाश जोशी के बीच।
2. वर्ष 2000 में शिवराज सिंह चौहान और विक्रम वर्मा के बीच। उस बार विक्रम वर्मा जीते थे।
इस बार भी माना जा रहा है कि मतदान की नौबत नहीं आएगी और सर्वसम्मति से ही नए अध्यक्ष का नाम तय हो जाएगा।