मध्य प्रदेश की सियासत में जल्द बड़ा संगठनात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की हरियाणा के समालखा में हुई अहम बैठक के बाद बीजेपी में नए संगठन महामंत्रियों की नियुक्ति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, संघ करीब 50 प्रचारकों को बीजेपी में नई जिम्मेदारियां सौंपने की तैयारी में है, जिससे संगठन और सरकार के बीच तालमेल और मजबूत हो सके।
समालखा बैठक के बाद तेज हुई हलचल
हरियाणा के समालखा में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में संगठनात्मक बदलावों को लेकर गहन मंथन हुआ। इस बैठक के बाद मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में नए संगठन महामंत्रियों की नियुक्ति की अटकलें तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही इस दिशा में बड़ा फैसला लिया जा सकता है।
50 प्रचारकों को BJP में नई जिम्मेदारी की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, संघ ने करीब 50 प्रचारकों को भारतीय जनता पार्टी में अलग-अलग पदों पर तैनात करने पर विचार किया है। इसका मकसद संगठन की जमीनी पकड़ को मजबूत करना और पार्टी के कार्यों में अनुशासन व समन्वय को बेहतर बनाना है। मध्य प्रदेश में संभागीय संगठन महामंत्री नियुक्त करने की चर्चा भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
प्रदेश में बदल सकता है संगठन का ढांचा
वर्तमान में मध्य प्रदेश में मालवा, मध्य भारत और महाकौशल जैसे क्षेत्रीय ढांचे पर संगठन कार्य करता है। लेकिन नई योजना के तहत इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, सागर और रीवा जैसे संभागों को अलग-अलग कार्यक्षेत्र बनाया जा सकता है। इससे संगठन को स्थानीय स्तर पर अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाने की कोशिश होगी।
मंत्रियों के स्टाफ पर भी रहेगी नजर
सूत्र बताते हैं कि संघ अब मंत्रियों के निजी स्टाफ की नियुक्तियों पर भी नजर रख सकता है। प्रस्ताव है कि केवल संघ से प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं को ही इन पदों पर तैनात किया जाए, ताकि सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित किया जा सके। यह कदम कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और नियंत्रण बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
वरिष्ठ नेताओं की वापसी और प्रमोशन संभव
इस संभावित बदलाव के तहत कुछ ऐसे बीजेपी नेता, जिनकी पृष्ठभूमि संघ से रही है, उन्हें पदोन्नति मिल सकती है। वहीं, कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों की संघ में वापसी भी संभव बताई जा रही है। हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन संकेत साफ हैं कि जल्द ही बड़े संगठनात्मक फैसले सामने आ सकते हैं।