मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू होने जा रहा है और 18 फरवरी को वर्ष 2026–27 का बजट पेश किया जाएगा। बजट से पहले सरकार ने आम लोगों और विशेषज्ञों से मिले सुझावों को शामिल करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। वित्त विभाग के संकेतों से साफ है कि इस बार का बजट विकास और जनकल्याण को केंद्र में रखकर तैयार किया जा रहा है।
बजट सत्र से पहले सरकार की तैयारी
राज्य सरकार बजट से पहले विभिन्न वर्गों से प्राप्त सुझावों को संकलित कर रही है, ताकि उन्हें प्रस्तावों में जगह दी जा सके। अधिकारियों और विषय विशेषज्ञों के साथ बैठकों का दौर जारी है। इसका उद्देश्य यह है कि योजनाओं का लाभ सीधे आम नागरिकों तक पहुंचे और आने वाले वर्षों के विकास की मजबूत नींव रखी जा सके।
प्री-बजट बैठकों में रखी गई बड़ी मांगें
दिल्ली में आयोजित प्रादेशिक स्तर की प्री-बजट बैठक में बीते वर्ष के बजट से किए गए विकास कार्यों की रिपोर्ट पेश की गई थी। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2026–27 के लिए बड़ी राशि की मांग भी सामने रखी गई। सरकार का कहना है कि इस बार का बजट सभी वर्गों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है और इसे जमीनी जरूरतों के अनुसार आकार दिया गया है।
आम आदमी को क्या मिलने के आसार?
सरकार के संकेतों के मुताबिक, सड़क निर्माण, सिंचाई परियोजनाएं, चिकित्सा सेवाएं, शिक्षा व्यवस्था और गरीब कल्याण योजनाएं इस बजट के प्रमुख स्तंभ रहेंगे। इन क्षेत्रों में अलग-अलग राशि आवंटित करने की तैयारी की जा रही है, ताकि बुनियादी ढांचे को मजबूती मिले और ग्रामीण व शहरी दोनों इलाकों में विकास की रफ्तार बढ़ सके।
सिंहस्थ और दीर्घकालिक योजनाओं पर नजर
सरकार ने वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ आयोजन के लिए केंद्र से 2000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता की मांग की है। इसके अलावा आने वाले पांच वर्षों को ध्यान में रखकर बजट को दीर्घकालिक विकास की रूपरेखा के अनुसार ढालने की बात कही गई है, जिससे राज्य में बड़े बुनियादी प्रोजेक्ट्स को गति मिल सके।
सभी क्षेत्रों के विकास का खाका तैयार
बजट को अंतिम रूप देने से पहले प्रदेश के सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकें की गई हैं। आम लोगों और विशेषज्ञों के सुझावों को भी शामिल किया जा रहा है, ताकि संसाधनों का आवंटन वास्तविक जरूरतों के अनुसार किया जा सके। सरकार का दावा है कि यह बजट संतुलित और भविष्य की दिशा तय करने वाला होगा।