मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र 2026 से पहले ही सियासत गरमा गई है। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई 35 मौतों के मुद्दे पर विपक्ष ने विधानसभा परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। हाथों में पानी की बोतलें और तख्तियां लेकर पहुंचे विधायकों ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया। नेता प्रतिपक्ष ने मंत्रियों की जिम्मेदारी तय करने और मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग तक कर डाली।
विधानसभा परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन
Madhya Pradesh Legislative Assembly के बजट सत्र से पहले विपक्षी विधायकों ने परिसर में नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी दूषित पानी की बोतलें लेकर पहुंचे और सरकार पर जनता को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने में विफल रहने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि जब सरकार पानी टैक्स वसूलती है, तो सुरक्षित पेयजल देना उसकी जिम्मेदारी है।
भागीरथपुरा जलकांड पर सीधी जवाबदेही की मांग
नेता प्रतिपक्ष Umang Singhar ने आरोप लगाया कि शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने समय पर कार्रवाई नहीं की, जिससे 35 लोगों की जान चली गई। उन्होंने कहा कि गरीब परिवार फिल्टर या आरओ मशीन नहीं लगा सकते, इसलिए वे सरकारी सप्लाई पर निर्भर हैं। ऐसे में जिम्मेदार मंत्रियों पर कार्रवाई होनी चाहिए और उनसे इस्तीफा लिया जाए।
तीन मंत्रियों पर सीधा निशाना, घेराव की चेतावनी
विपक्ष ने ऐलान किया है कि तीन मंत्रियों—Kailash Vijayvargiya, Rajendra Shukla और Vijay Shah—की बात सदन में नहीं सुनी जाएगी। मांगें नहीं मानी गईं तो 24 फरवरी को किसानों के साथ विधानसभा घेराव की चेतावनी दी गई है। साथ ही सरकार से अब तक लिए गए कर्ज पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग भी उठी है।
सरकार का पलटवार: ‘ऐतिहासिक कार्रवाई’ का दावा
मंत्री Chaitanya Kumar Kashyap ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बताया और कहा कि मुख्यमंत्री Mohan Yadav के नेतृत्व में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। सरकार का कहना है कि विपक्ष मुद्दों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है और संसदीय परंपराओं का सम्मान नहीं कर रहा।
बजट सत्र में गरमाएंगे ये मुद्दे
दूषित जलकांड, कथित सिरप कांड, मंत्रियों की जवाबदेही और राज्य के कर्ज जैसे मुद्दे बजट सत्र में छाए रहने की संभावना है। विपक्ष का कहना है कि जनता के हित में जवाबदेही तय होनी चाहिए, जबकि सरकार विकास कार्यों और प्रशासनिक कदमों का हवाला दे रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में सदन में तीखी बहस के आसार हैं।