मध्यप्रदेश विधानसभा में बजट सत्र 2026 के दौरान सरकार ने 19,287 करोड़ रुपये का तीसरा अनुपूरक बजट पेश किया। इस अतिरिक्त प्रावधान में सिंचाई परियोजनाओं, ऊर्जा क्षेत्र की वित्तीय जरूरतों और कर्ज के ब्याज भुगतान पर खास जोर दिखा। सरकार का कहना है कि यह कदम चालू वित्तीय वर्ष की प्राथमिक परियोजनाओं को गति देने और विकास व वित्तीय संतुलन साधने के लिए जरूरी है।
नर्मदा घाटी विकास को सबसे बड़ा आवंटन
अनुपूरक बजट में सबसे बड़ी राशि 4,700 करोड़ रुपये नर्मदा घाटी विकास विभाग को दी गई है। यह धनराशि लंबित सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने, नई नहरों के विस्तार और सिंचाई क्षमता बढ़ाने पर खर्च होगी। सरकार का दावा है कि इससे किसानों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा और कृषि उत्पादकता में वृद्धि होगी। नर्मदा बेसिन से जुड़े जिलों में जल उपलब्धता बेहतर करने की भी योजना है।
ऊर्जा कंपनियों को 2,630 करोड़ का सहारा
ऊर्जा विभाग की कंपनियों को अल्पकालीन ऋण उपलब्ध कराने के लिए 2,630 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह राशि बिजली उत्पादन और वितरण से जुड़ी कंपनियों की तात्कालिक वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी। सरकार का मानना है कि इससे बिजली आपूर्ति व्यवस्था मजबूत होगी और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।
स्थानीय निकायों के लिए 1,569 करोड़
शहरी और ग्रामीण विकास कार्यों को गति देने के लिए स्थानीय निकायों को 1,569 करोड़ रुपये का अनुदान रखा गया है। इस राशि से सड़क, पेयजल, स्वच्छता और बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। पंचायतों और नगरीय निकायों को इससे वित्तीय मजबूती मिलने की उम्मीद है।
कर्ज के ब्याज भुगतान पर 1,650 करोड़
राज्य सरकार ने पूर्व में लिए गए ऋण के ब्याज भुगतान के लिए 1,650 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इससे स्पष्ट है कि बजट का एक अहम हिस्सा वित्तीय दायित्वों के निर्वहन पर केंद्रित है। सरकार विकास कार्यों के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की कोशिश कर रही है।
सदन में सियासी तकरार तेज
बजट सत्र के दूसरे दिन पेश हुए इस अनुपूरक बजट पर विपक्ष ने सवाल उठाए और प्राथमिकताओं को लेकर चर्चा की मांग की। सदन परिसर में कुछ स्थानीय मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुआ। आने वाले दिनों में इस प्रस्ताव पर विस्तृत बहस की संभावना है, जिससे सरकार की विकास रणनीति और स्पष्ट होगी।