मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी 2026 से शुरू होकर 6 मार्च तक चलेगा। करीब तीन हफ्ते चलने वाले इस सत्र में बजट के साथ कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। इस बार सबसे खास बात यह है कि विधायकों ने ऑफलाइन के बजाय डिजिटल माध्यम से बड़ी संख्या में सवाल भेजे हैं, जिससे विधानसभा की कार्यप्रणाली में तकनीकी बदलाव साफ नजर आ रहा है।
19 दिनों का सत्र, 12 बैठकें प्रस्तावित
आगामी बजट सत्र को लेकर विधानसभा सचिवालय की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। यह सत्र 19 दिनों तक चलेगा, जिसमें सदन की 12 बैठकें प्रस्तावित की गई हैं। इन बैठकों के दौरान सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपना वार्षिक बजट पेश करेगी और विभिन्न विभागों के कामकाज पर चर्चा होगी। सत्र के दौरान विधायकों के वेतन-भत्तों में बढ़ोतरी से जुड़े प्रस्ताव पर भी विचार किया जा सकता है।
ऑनलाइन सवालों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
इस बार विधायकों ने तकनीक का भरपूर इस्तेमाल किया है। अब तक कुल 3478 सवाल लगाए जा चुके हैं, जिनमें 2253 ऑनलाइन और 1225 ऑफलाइन माध्यम से भेजे गए हैं। इन प्रश्नों में 1750 तारांकित और 1728 अतारांकित शामिल हैं। विधानसभा की ओर से डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सवाल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और शून्यकाल से जुड़ी सूचनाएं भेजने की सुविधा दी गई है, जिससे प्रक्रिया अधिक तेज और पारदर्शी हुई है।
अब भी खुले हैं कुछ प्रस्तावों के विकल्प
हालांकि सवाल भेजने की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है, लेकिन ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, शून्यकाल की सूचनाएं, नियम-139 के तहत प्रस्ताव और याचिकाएं जमा करने के लिए अभी भी समय बचा है। माना जा रहा है कि इन माध्यमों से सत्र के दौरान कई नए और तात्कालिक मुद्दे सरकार के सामने रखे जाएंगे।
विपक्ष ने बनाई आक्रामक रणनीति
बजट सत्र को लेकर विपक्षी दल सरकार को घेरने की तैयारी में जुटा है। बिगड़ती कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार के आरोप, इंदौर में दूषित पानी की समस्या और छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप से हुई मौतों जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की योजना है। इसके अलावा, महिला सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे विषयों पर भी तीखी बहस होने के आसार हैं।
महिलाओं-युवाओं पर फोकस, बड़े ऐलान की उम्मीद
सत्र से पहले कयास लगाए जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बजट में महिलाओं और युवाओं के लिए कई नई योजनाओं की घोषणा कर सकते हैं। खास तौर पर ‘लाडली बहना योजना’ के लिए करीब 20,000 करोड़ रुपये के प्रावधान की संभावना जताई जा रही है, जो पिछले वर्ष से अधिक हो सकता है। इससे राज्य की सामाजिक योजनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद है।