भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की अहम बैठक में विकास, रोजगार और प्रशासनिक सुधार से जुड़े कई दूरगामी फैसले लिए गए। वंदे मातरम के साथ शुरू हुई बैठक में नर्मदा परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों के लिए विशेष आर्थिक पैकेज, ग्रामीण सड़कों के विस्तार, मेट्रो संचालन, युवा स्वरोजगार और सरकारी कर्मचारियों के पदों से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों पर मुहर लगी।
डूब प्रभावित परिवारों को राहत, विशेष पैकेज को मंजूरी
कैबिनेट ने अनूपपुर, मंडला और डिंडोरी जिलों में प्रस्तावित अपर नर्मदा, राघवपुर और बसानिया बहुउद्देशीय परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों के लिए 1,782 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज को स्वीकृति दी। यह राशि पहले से डीपीआर में शामिल प्रावधानों के अतिरिक्त है। तीनों परियोजनाओं की कुल लागत 5,512 करोड़ रुपये से अधिक है, जिससे करीब 72 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा और 125 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इन योजनाओं से प्रभावित प्रत्येक परिवार को 12.50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा, जबकि अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के परिवारों को अतिरिक्त सहायता मिलेगी।
ग्रामीण सड़कों और अवसंरचना को मिलेगी नई रफ्तार
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं अवसंरचना योजना के तहत 693 करोड़ रुपये से अधिक की लागत के लगभग 3,800 कार्यों को स्वीकृति दी गई। इससे गांवों को बेहतर सड़कों और बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने में मदद मिलेगी।
भोपाल-इंदौर मेट्रो के लिए बजट स्वीकृत
कैबिनेट ने भोपाल और इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के संचालन व रखरखाव के लिए 90 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मंजूर की। इससे मेट्रो सेवाओं को सुचारु रखने और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने में सहयोग मिलेगा।
युवाओं के लिए उद्यम क्रांति योजना जारी रहेगी
मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना को वर्ष 2030-31 तक जारी रखने का निर्णय लिया गया। इसके तहत युवाओं को स्वरोजगार के लिए 50 हजार से 50 लाख रुपये तक का ऋण मिलेगा, जिस पर ब्याज अनुदान और ऋण गारंटी की सुविधा दी जाएगी।
वन विज्ञान केंद्र और प्रशासनिक सुधार
राज्य में 6 वन विज्ञान केंद्र स्थापित करने के लिए 48 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। वहीं, सरकारी कर्मचारियों के स्थायी और अस्थायी पदों के बीच का अंतर समाप्त करने का फैसला प्रशासनिक सुधार की दिशा में अहम माना जा रहा है।