मध्य प्रदेश में बीजेपी अध्यक्ष के रूप में नए नाम की घोषणा के बाद अब सियासी गलियारों में मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि लंबे समय से खाली पड़ी कैबिनेट की सीटों को भरने की तैयारी शुरू हो सकती है। सीनियर विधायकों की
उपेक्षा और संगठन के भीतर असंतोष को देखते हुए यह बदलाव संभव माना जा रहा है। फिलहाल चार मंत्री पद खाली हैं और कई अनुभवी विधायक इस दौड़ में माने जा रहे हैं।
प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद बदले समीकरण
बीजेपी ने हाल ही में संगठन में बदलाव करते हुए प्रदेश अध्यक्ष के रूप में नया नाम सामने रखा है। इसके बाद अब पार्टी के रणनीतिकार सत्ता पक्ष में भी संतुलन बनाने की तैयारी में हैं। संगठन और सत्ता में तालमेल बनाने के लिए मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर गंभीर मंथन शुरू हो चुका है।
चार मंत्री पद खाली, बढ़ी संभावनाएं
प्रदेश सरकार में मुख्यमंत्री समेत 36 मंत्रियों की अनुमति है, लेकिन वर्तमान में सिर्फ 31 मंत्री ही कार्यरत हैं। एक मंत्री के उपचुनाव हारने और इस्तीफे के बाद यह स्थान खाली हो गया। ऐसे में चार पदों को भरने के लिए नए चेहरों की एंट्री लगभग तय मानी जा रही है।
सीनियर विधायकों को साधने की कोशिश
इस बार के विधानसभा चुनावों में कई वरिष्ठ विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली थी, जिससे नाराजगी की स्थिति बनी। अब अटकलें हैं कि इन्हीं सीनियर नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल कर संगठन संतुलन साध सकता है। इनमें गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह, जयंत मलैया, अजय विश्वोई जैसे कई अनुभवी चेहरे शामिल हैं।
निगम मंडलों में भी जल्द होंगी नियुक्तियां
मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही निगम-मंडलों में नियुक्तियों की प्रक्रिया भी तेज हो सकती है। संगठन में समन्वय के लिए यह कदम भी अहम माना जा रहा है। सियासी जानकारों का मानना है कि बीजेपी अब सत्ता और संगठन दोनों में अनुभवी नेताओं को संतुलित भूमिका में लाना चाहती है।