मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मोहन सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अटकलें तेज हैं और माना जा रहा है कि नवरात्र के आसपास कैबिनेट में चार से पांच नए चेहरे शामिल हो सकते हैं। हालांकि कुछ नामों पर दिल्ली स्तर पर वीटो लगने से राजनीतिक नियुक्तियों की सूची फिलहाल अटक गई है, लेकिन अंदरखाने मंथन अंतिम दौर में बताया जा रहा है।
नवरात्र के आसपास हो सकता है विस्तार
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने हाल ही में दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व से कई दौर की चर्चा की। इसके बाद यह संकेत मिले हैं कि सब कुछ अनुकूल रहा तो नवरात्र के दौरान मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है। माना जा रहा है कि चार से पांच नए मंत्रियों को शामिल कर क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की जाएगी।
इन नामों की दौड़ में चर्चा
मंत्री बनने की दौड़ में वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। महिला चेहरे के तौर पर इंदौर से मालिनी गौड़ की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। सिंधिया खेमे से बृजेंद्र सिंह यादव को मौका मिलने की चर्चा है। इसके अलावा शैलेंद्र कुमार जैन, प्रदीप लारिया और अर्चना चिटनीस के नाम भी सुर्खियों में हैं। आदिवासी कोटे से किसी वरिष्ठ विधायक को शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक नियुक्तियों पर लगा वीटो
निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में नियुक्तियों को लेकर भी चर्चा तेज है। बताया जा रहा है कि कुछ नामों पर दिल्ली में प्रभाव रखने वाले एक बड़े नेता ने वीटो लगा दिया, जिससे सूची पुनर्विचार में चली गई। हालांकि एक-दो नामों को छोड़ अधिकांश पर सहमति बन चुकी है। सूत्रों का कहना है कि अंतिम मुहर कभी भी लग सकती है और सूची जारी होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।
संघ पृष्ठभूमि के चेहरों को मिल सकता है मौका
प्रमुख निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में संघ पृष्ठभूमि से जुड़े नेताओं को प्राथमिकता दिए जाने की चर्चा है। विनोद गोटिया और आशुतोष तिवारी जैसे नामों पर विचार बताया जा रहा है। वहीं पूर्व मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं—रामनिवास रावत, अरविंद भदौरिया, इमरती देवी, कमल पटेल, चेतन सिंह और केपी यादव—को भी विभिन्न जिम्मेदारियों में समायोजित किए जाने की अटकलें हैं।
दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व से मंथन
बजट सत्र स्थगित होते ही सीएम और प्रदेश अध्यक्ष दिल्ली पहुंचे, जहां केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन समेत वरिष्ठ नेताओं से चर्चा हुई। माना जा रहा है कि राजनीतिक नियुक्तियों और संगठनात्मक फेरबदल पर अंतिम रणनीति तैयार कर ली गई है। अब सबकी नजर आधिकारिक घोषणा पर टिकी है।