मध्य प्रदेश में चीतों की संख्या बढ़ाने की तैयारी तेज हो गई है। कूनो और गांधी सागर के बाद अब नौरादेही को चीते का नया आशियाना बनाया जाएगा। केंद्र सरकार ने इसके लिए 4 करोड़ रुपए की मंजूरी दे दी है। नई बसाहट के लिए नौरादेही टाइगर रिजर्व में क्वारेंटाइन और सॉफ्ट रिलीज बोमा बनाने के साथ ही जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा।
नौरादेही में तैयार होगा नया ठिकाना
एनटीसीए की मंजूरी के साथ नौरादेही में चीतों के लिए पूरी तैयारी शुरू हो गई है। सागर और दमोह जिलों में फैले इस रिजर्व में चार क्वारेंटाइन बोमा और एक सॉफ्ट रिलीज बोमा बनाए जाएंगे। इसके अलावा बाड़ेबंदी और अन्य आवश्यक सुविधाओं का निर्माण भी जल्द शुरू होगा। नए फंड मिलने के बाद पूरे 2339 वर्ग किमी में फैले नौरादेही रिजर्व को चीतों की बसाहट के लिए तैयार किया जाएगा।
निरीक्षण में चुने गए तीन प्रमुख इलाके
एनटीसीए ने नौरादेही के सिंघपुर, मोहली और झापा फॉरेस्ट रेंज का निरीक्षण कर इन क्षेत्रों को चीतों के लिए सबसे उपयुक्त माना। जल्द ही टीम इन इलाकों का दौरा कर विस्तृत योजना तैयार करेगी। इन फॉरेस्ट रेंज में 13 गांव भी शामिल हैं, जिन्हें चीतों की बसाहट से पहले पुनर्वासित किया जाएगा। आसपास 30 किमी के दायरे में बाड़ेबंदी की जाएगी।
एमपी में ही बढ़ेगी चीतों की संख्या
हालांकि पहले योजना थी कि चीतों को राजस्थान या गुजरात में भी बसाया जाए, लेकिन अब एनटीसीए ने स्पष्ट किया है कि चीतों को केवल मध्य प्रदेश में ही बढ़ाया जाएगा। 2026 में अफ्रीका से आने वाले नए चीतों की खेप नौरादेही में बसाई जाएगी। यदि यह संभव नहीं हुआ, तो कूनो में पले-बढ़े जवान शावकों को शिफ्ट किया जाएगा।
चीतों का भारत में पुनरुद्धार
भारत में चीतों को आखिरी बार 1952 में देखा गया था। विलुप्त प्रजाति को बचाने के लिए 2022 में नामीबिया से 8 और 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों की खेप लाई गई। अब तक कुल 20 चीतों को भारत लाया गया, जिनसे कूनो में पिछले दो सालों में 26 शावक जन्मे। हालांकि विभिन्न कारणों से केवल 19 जीवित बचे हैं।