मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने काशी विश्वनाथ धाम पहुंचकर न केवल बाबा के दर्शन किए, बल्कि मंदिर की व्यवस्थाओं को भी करीब से समझा। श्रद्धालु प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण और CCTV मॉनिटरिंग जैसे पहलुओं पर उन्होंने अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की। इस दौरे का मकसद उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ कुंभ 2028 की तैयारियों को और बेहतर बनाना है।
काशी विश्वनाथ धाम में व्यवस्थाओं का अध्ययन
काशी विश्वनाथ धाम में सीएम मोहन यादव ने मंदिर प्रशासन के साथ बैठक कर SOP और व्यवस्थाओं की जानकारी ली। यहां श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए अपनाए गए आधुनिक तरीकों को समझा गया, जो बड़े धार्मिक आयोजनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
भीड़ प्रबंधन का अनोखा मॉडल
मंदिर प्रशासन ने बताया कि परिसर में 115 विग्रह स्थापित हैं, जिनमें 14 प्रमुख महादेव हैं। रुद्राभिषेक जैसी धार्मिक गतिविधियों को अलग-अलग स्थानों पर आयोजित कर श्रद्धालुओं को विभाजित किया जाता है, जिससे भीड़ का दबाव कम होता है। साथ ही डिजिटल माध्यम और बुकलेट के जरिए श्रद्धालुओं को जानकारी दी जाती है, जिससे व्यवस्थाएं सुचारू बनी रहती हैं।
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों पर फोकस
सिंहस्थ कुंभ मेला 2028 को ध्यान में रखते हुए यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। उज्जैन में हर 12 साल में आयोजित होने वाले इस मेले में करोड़ों श्रद्धालु शामिल होते हैं। ऐसे में काशी के सफल मॉडल को अपनाकर व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने की योजना है।
यूपी-एमपी सहयोग से विकास को रफ्तार
सीएम यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के संबंध धार्मिक और ऐतिहासिक रूप से बेहद गहरे हैं। दोनों राज्य अब प्रतिस्पर्धा नहीं बल्कि सहयोग के साथ आगे बढ़ रहे हैं। केन-बेतवा नदी परियोजना और 2000 मेगावाट सोलर प्रोजेक्ट जैसे संयुक्त प्रयास क्षेत्रीय विकास को नई दिशा दे रहे हैं।
धार्मिक पर्यटन से अर्थव्यवस्था को बल
सीएम ने जोर देकर कहा कि धार्मिक पर्यटन केवल आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास का मजबूत माध्यम भी है। इससे स्थानीय उद्योग, MSME और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। साथ ही सांस्कृतिक विरासत को भी वैश्विक पहचान मिलती है, जिससे राज्य की छवि और मजबूत होती है।