मध्यप्रदेश के शहडोल और आसपास के जिलों में कोयले की अवैध तस्करी का बड़ा नेटवर्क सामने आया है। फिल्मी अंदाज में चल रहे इस कारोबार में रोजाना करीब 30 ट्रकों के जरिए लगभग 1200 टन कोयले का अवैध परिवहन किया जा रहा है। जंगलों के रास्तों, सीमा क्षेत्रों के ‘डेड जोन’ और कथित सांठगांठ के सहारे यह तस्करी बेखौफ जारी है। इस पूरे नेटवर्क का तरीका देखकर लोगों को फिल्मी कहानी की याद आने लगी है।
जंगलों और सीमा क्षेत्रों का इस्तेमाल
कोयला माफिया अवैध परिवहन के लिए किसी एक सड़क पर निर्भर नहीं हैं। वे जिलों की सीमाओं और पुलिस थानों के बीच पड़ने वाले ‘डेड जोन’ का फायदा उठाते हैं। इन इलाकों में अधिकार क्षेत्र को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रहती है, जिसका लाभ उठाकर ट्रक आसानी से एक जिले से दूसरे जिले में निकल जाते हैं। जंगलों और आंतरिक ग्रामीण रास्तों का इस्तेमाल इस अवैध कारोबार की सबसे बड़ी ताकत बन गया है।
लाइनमैन नेटवर्क से चलता है पूरा सिस्टम
कोयले की तस्करी के लिए माफिया ने एक संगठित नेटवर्क तैयार किया है। हर रूट पर कुछ किलोमीटर की दूरी पर लाइनमैन तैनात रहते हैं, जो ट्रकों की आवाजाही पर नजर रखते हैं। जैसे ही रास्ता सुरक्षित होने का संकेत मिलता है, ड्राइवरों को कोड वर्ड के जरिए आगे बढ़ने या रास्ता बदलने के निर्देश दिए जाते हैं। अगर किसी क्षेत्र में सख्ती बढ़ती है तो ट्रकों को सीमा के पास ढाबों पर रोक दिया जाता है और संकेत मिलते ही उन्हें आगे भेज दिया जाता है।
रोजाना 30 ट्रकों से 1200 टन कोयले की आवाजाही
सूत्रों के अनुसार 10 से 12 पहियों वाले ट्रकों में सामान्य तौर पर 16 से 30 टन कोयला लादा जाता है, लेकिन अवैध कारोबार में ट्रकों को ओवरलोड कर करीब 40 टन तक भर दिया जाता है। इसी वजह से प्रतिदिन लगभग 30 ट्रकों के जरिए करीब 1200 टन कोयले का अवैध परिवहन होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
चार बड़े कॉरिडोर से फैलता है नेटवर्क
कोयला तस्करी के लिए कई प्रमुख रूट इस्तेमाल किए जा रहे हैं। उत्तर दिशा में सतना-रीवा कॉरिडोर से सीमेंट प्लांट और ईंट भट्टों तक कोयला पहुंचाया जाता है। पूर्व दिशा में सिंगरौली कॉरिडोर के जरिए अवैध कोयले को वैध दस्तावेजों के साथ मिलाकर खपाया जाता है। पश्चिम में कटनी के औद्योगिक क्षेत्रों तक आपूर्ति की जाती है, जबकि दक्षिण-पूर्व दिशा में छत्तीसगढ़ के रास्ते बिलासपुर क्षेत्र तक कोयला पहुंचाया जाता है।
अवैध कारोबार पर कार्रवाई की तैयारी
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि कोयले के अवैध परिवहन को रोकने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। हाल ही में कुछ मामलों में कार्रवाई भी की गई है और आगे संयुक्त अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही इस नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की जाएगी।